हरदोई। ग्राम पंचायतों में प्रशासक नामित किए जाने के बाद भी गड़बड़ी रुकने का नाम नहीं ले रही। बिल न वाउचर और गेटवे से इतर प्रदेश के 50 जनपदों की 157 ग्राम पंचायतों ने 1.46 करोड़ से अधिक रुपये का भुगतान निकाल लिया है। इसमें जिले की पांच ग्राम पंचायतें गड़बड़ी वाली सूची में टॉप टेन में शामिल हैं। इन ग्राम पंचायतों में 7,79,585 रुपये का भुगतान निकाला गया है।
ग्राम पंचायतों में पंचायतीराज विभाग के माध्यम से राज्य वित्त और केंद्रीय वित्त आयोग की मद में बड़ी मात्रा में रुपये दिए जाते हैं। कायदा कानून के मुताबिक रुपयों को खर्च किए जाने से पहले काम कराने की कार्ययोजना तैयार की जाती है। वहीं काम के पूरा होने पर अभिलेखीय प्रक्रिया पूरी करने के साथ ही भुगतान के लिए बिल-वाउचर को ई-ग्राम स्वराज पर फीड किए जाने की भी अनिवार्यता है। 26 मई को निर्वाचित प्रधानों के कार्यकाल पूरा होने के बाद प्रशासक नामित किए गए। निवर्तमान प्रधान ही प्रशासक नामित होने से पंचायत सचिवों से अच्छा समन्वय है। इससे एक से 15 सितंबर के मध्य 50 जिलों में 1,46,57,130 रुपये का भुगतान गेटवे से बाहर किया गया।
इन ग्राम पंचायतों ने 631 ट्रांजेक्शन के माध्यम से भुगतान निकाला है। इसमें खास बात यह है कि ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर बिल और वाउचर मैच नहीं कर रहे हैं। इतना ही नहीं यह भुगतान गेटवे के बाहर से किए गए हैं। पोर्टल के परीक्षण के दौरान पंचायतीराज विभाग के निदेशक अमित सिंह ने इसे पकड़ लिया। इस पर संबंधित जिलों के डीपीआरओ से आख्या तलब की है। (संवाद)
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जनपदों में कुछ इस प्रकार से गेटवे के बाहर से निकाला गया भुगतान
पंचायतीराज निदेशालय स्तर पर पकड़ में आई गड़बड़ी में शामिल 50 जनपदों में कुशीनगर की चार ग्राम पंचायतों में 14.57 लाख, बस्ती की सात ग्राम पंचायतों में 12.83 लाख, गोरखपुर की 10 ग्राम पंचायतों में 12.02 लाख, श्रावास्ती की पांच ग्राम पंचातयों में 10.54 लाख, एटा की तीन ग्राम पंचायतों में 8.79 लाख, बाराबंकी की आठ ग्राम पंचायतों में 8.59 लाख,हरदोई की पांच ग्राम पंचायतों में 7.97 लाख, प्रयागराज की 10 ग्राम पंचायतों में 6.79 लाख, सीतापुर की पांच ग्राम पंचायतों में 5.39 लाख, कानपुरनगर की तीन ग्राम पंचायतों में 4.22 लाख, वाराणसी की आठ ग्राम पंचायतों 4.02 लाख, आजमगढ़ की सात ग्राम पंचायतों में 3.83 लाख का भुगतान निकाला गया।
इसके साथ ही महोबा की एक ग्राम पंचायत में 3.73 लाख, जौनपुर की तीन ग्राम पंचायतों में 3.33 लाख, सिद्धार्थनगर की पांच ग्राम पंचायतों में 3.27 लाख, फतेहपुर की चार ग्राम पंचायतों में 3.06 लाख, मेरठ की दो ग्राम पंचायतों में 2,79 लाख, गोंडा की दो ग्राम पंचायतों में 2.47 लाख, अंबेडकर नगर की 10 ग्राम पंचायतों में 2.40 लाख, अलीगढ़ की तीन ग्राम पंचायतों में 1.89 लाख, लखनऊ की तीन पंचायतों में 1.89 लाख, फिरोजाबाद की एक पंचायत में 1.80 लाख, मथुरा की दो पंचायतों में 1.68 लाख, गाजीपुर की तीन पंचायतों में 1.50 लाख, कन्नौज की एक पंचायत में 1.49 लाख, महाराजगंज की तीन पंचायतों में 1.31 लाख, पीलीभीत की तीन पंचायतों में 1.24 लाख, बुलंदशहर की एक पंचायत में 1.21 लाख बलरामपुर तीन पंचायतों में 1.05 लाख रुपये का भुगतान निकाला गया है।
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गेटवे के बाहर से किए गए भुगतान की जानकारी जुटाई जा रही है। बिल और वाउचर न लगाने वाली ग्राम पंचायतों के जिम्मेदारों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। निदेशालय से ग्राम पंचायतवार जानकारी लेकर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। -श्रेया उपाध्याय, डीपीआरओ
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इन ग्राम पंचायतों में निकाला गया भुगतान
हरदोई। पंचायतीराज विभाग के निदेशक अमित कुमार ने ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर एक से 15 सितंबर तक गेटवे के बाहर किए गए भुगतान की समीक्षा में पाया कि जिले में पांच ग्राम पंचायतें शामिल हैं। इसमें विकास खंड टड़ियावां की नेवादा में 3,16,800 रुपये का भुगतान किया गया है। ऐसे ही ब्लॉक टोडरपुर की ग्राम पंचायत सिकंदरपुर बाजार में 19,840 रुपये, कछौना की दीननगर में 3,77,486 और कछौना देहात में 66,092 रुपये और बिलग्राम की कचाना में 17,640 रुपये का भुगतान गेटवे से हटकर किया गया है। अब देखना है कि इन ग्राम पंचायतों के जिम्मेदारों की जवाबदेही तय की जाती है या फिर तकनीकी दिक्कतों का हवाला देकर सब कुछ निपटा दिया जाता है।