भरावन। 84 कोसी परिक्रमा में शामिल रामादल को यहां गंदगी और अंधेरे में पड़ाव डालना पड़ सकता है। पड़ाव स्थल पर प्रशासन अभी बिजली व्यवस्था की शुरुआत तक नहीं कर सका है, जबकि हर्रेया पड़ाव को अब सिर्फ दो दिन शेष बचे हैं।
चार मार्च को रामादल इस पड़ाव पर अपना डेरा डाल देगा। कम समय में व्यवस्था में लगे लोग कोई चमत्कार कर दें, तो अलग बात है, वरना तैयारियों की वर्तमान गति को देखकर बेेहतर व्यवस्था की उम्मीद कम ही है।
आस्था के लिए देश-विदेश में जानी जाने वाली 84 कोसी परिक्रमा का एक पड़ाव जिले के हर्रेया गांव में भी है, लेकिन परिक्रमा के स्वागत के लिए व्यवस्थापकों की सुस्ती लोगों को खल रही है।
मेला सचिव महंत संतोष दास खाकी ने बताया कि दो दिन शेष बचे हैं, फिर भी अभी तक विद्युत कर्मी गहरी नींद में सो रहे हैं। करीब तीन किमी की परिधि में देश-विदेश से परिक्रमार्थी डेरा डालने यहां आ रहे हैैं।
श्रद्धालुओं को उजाले की आवश्यकता पड़ी, तो उनके पास सिर्फ टॉर्च ही सहारा होगी। इसके अलावा सफाई व्यवस्था भी बेहतर नहीं हैं। पड़ाव स्थल के आसपास झाड़ियां हैं, जिस गोमती नदी में रामादल स्नान करेगा उसमें सिल्ट जमी है।
मंगलवार को आंशिक रूप से नदी का केवल एक कोना साफ कर सफाई कर्मी चले गए। हर्रैया पड़ाव प्रमुख शुभम सिंह ने बताया विद्युत कर्मियों से बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन वार्ता नहीं हो सकी।
विदेशों में भी विख्यात है परिक्रमा
84 कोसी परिक्रमा विदेशों में भी विख्यात है। लोगों का कहना है कि परिक्रमा में विदेशी श्रद्धालु भी भाग लेते हैं। परिक्रमा के रामादल में विदेशी परिक्रमार्थियों की काफी संख्या होती है। हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं। ऐसे में पड़ाव पर खराब व्यवस्था देश की ख्याति को भी प्रभावित करेगी।
सात नल और टैंकर बुझाएंगे प्यास
परिक्रमार्थियों की पेेयजल की व्यवस्था के लिए पड़ाव पर सात नल और टैंकरों की व्यवस्था होगी। मेले में इर्द गिर्द के 50 गांवों के लोग भी आते हैं। लाखों लोगों की प्यास बुझाने के लिए पड़ाव स्थल पर लगे सात नल व बेनीगंज सहित कछौना से मंगाए जा रहे टैंकर सबकी प्यास बुझाएंगे।