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जीव-प्रकृति के योग से ब्रह्मांड का सृजन

Sat, 20 Jun 2015 12:19 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
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जीव और प्रकृति के योग से ही सृष्टि का निर्माण हुआ है। बिना योग के इस ब्रह्मांड की कल्पना करना भी बेकार है। आर्ट आफ लिविंग परिवार की वरिष्ठ टीचर शारदा ने बाबू श्रीश चंद्र अग्रवाल बारात घर में आयोजित त्रिदिवसीय हैपीनेस प्रोग्राम के तीसरे दिन समापन को यह बात योग के गुर समझाते हुए कही।
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उन्होंने कहा कि जड़ और चेतन के योग से ही इस संसार का सृजन हुआ है। योगासन, प्राणायाम और ध्यान तीनों ही योग के अंग हैं। इस भागमभाग जिंदगी में एक योग ही है, जो मनुष्यों को तनाव से मुक्ति दिला सकता है और आत्मसंतुष्टि प्रदान करवाता है। कहा कि केवल अष्टायोग का संपूर्ण अभ्यास ही जीवन के प्रत्येक पक्ष की देखभाल करने में सक्षम है।

यह प्रत्येक मानव के लिए लाभकारी है, भले ही उनकी जाति, संप्रदाय, लिंग या धर्म कोई भी हो। उन्होंने अंतिम दिन दोेनों पालियों में एक साथ में योग, ध्यान, प्राणायाम व सुदर्शन क्रिया का प्रशिक्षण दिया एवं सहज समाधि का ज्ञान दिया।
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इस मौके पर आनंद सिंह, रेनू सचान, समन्वयक आलोक श्रीवास्तव, रोहित अग्रवाल, कर्मवीर सिंह, नरेंद्र सिंह, इंदू शुक्ला व पद्मराग सिंह ने सहयोग दिया। शिविर में डा. सीके गुप्त, डा. अजय मिश्र, अविनाश मिश्र, राहुल चौहान, अनिल शर्मा आदि मौजूद थेे।
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