फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Hardoi News: इलाज के लिए अस्पताल, पर डॉक्टर नहीं, होम्योपैथिक व्यवस्था खुद बीमार

विज्ञापन
राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय में दवा लेने आए मरीज। - फोटो : बेतवा नदी का बढ़ा जलस्तर। संवाद
विज्ञापन
हरदोई। जिले के होम्योपैथिक चिकित्सालयों की स्थिति दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है। 13 होम्योपैथिक अस्पतालों में कहीं 19 साल से चिकित्सक नहीं तो कहीं 10 साल से फार्मासिस्ट की कुर्सी खाली पड़ी है। मरीजों का इलाज संबद्ध डॉक्टरों और फार्मासिस्टों के भरोसे चल रहा है। जहां चिकित्सक ओपीडी के लिए दूसरे अस्पतालों में तैनात हैं, वहीं उनके मूल तैनाती वाले केंद्र फार्मासिस्टों के भरोसे ही संचालित हो रहे हैं।
विज्ञापन

जिले में होम्योपैथिक इलाज कराने वालों की संख्या में कोई कमी नहीं है। हर माह 50 से 55 हजार मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं, लेकिन अस्पतालों में स्थायी स्टाफ की कमी के चलते स्वास्थ्य सेवाएं लड़खड़ा रही हैं। हालात यह हैं कि कई चिकित्सालयों में सालों से डॉक्टर तक नहीं तैनात हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने पास के अस्पतालों से डॉक्टरों और फार्मासिस्टों को तीन-तीन दिन की ड्यूटी पर जोड़ रखा है। इससे व्यवस्थाएं जैसे-तैसे चल रही हैं। इसका सीधा असर इलाज की गुणवत्ता पर पड़ रहा है और मरीजों का भरोसा टूट रहा है।
विज्ञापन


10 अस्पतालों में नहीं डॉक्टर, पांच में फार्मासिस्ट भी नहीं

36 होम्योपैथिक अस्पतालों में से 10 में डॉक्टर नहीं हैं। शहर स्थित रोडवेज बस स्टेशन के पास अस्पताल में दो डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन सिर्फ डॉ. निधि गर्ग ही सेवाएं दे रही हैं, जबकि दूसरा पद दो साल से रिक्त है। इसके अलावा हरपालपुर, शाहाबाद, खेतुई, असही-आजमपुर, भरखनी, काशीपुर, दुर्गागंज, इच्छनापुर, टंडौर खेड़ा और शुक्लापुर-भगत में भी चिकित्सक नहीं हैं। वहीं टंडौरखेड़ा, कुरसठ, उमरौली, भरखनी और डाभा के अस्पताल फार्मासिस्ट की कमी से जूझ रहे हैं।


भरखनी और टंडौर का भी बुरा हाल
भरखनी अस्पताल में 2006 में संचालन शुरू हुआ, लेकिन तब से लेकर अब तक कोई स्थायी डॉक्टर नहीं तैनात हुआ। 2018 में फार्मासिस्ट करुणा शंकर के सेवानिवृत्त होने के बाद यहां फार्मासिस्ट भी नहीं है। पचदेवरा के डॉ. इसरावती देवी और फार्मासिस्ट कमलदीन को यहां संबद्ध किया गया है। इसी तरह, टंडौर खेड़ा में डॉ. रूपाली यादव का सितंबर 2023 में तबादला हुआ था, लेकिन अब तक कोई नई नियुक्ति नहीं की गई। वहां फिलहाल उमरौली के डॉ. पवन कुमार और कल्याणमल के फार्मासिस्ट अखिलेश कुमार को भेजा गया है।


चिकित्सकों की कमी के लिए शासन को पत्र लिखा जा चुका है। चिकित्सालयों में रोस्टर के अनुसार चिकित्सक और फार्मासिस्टों की तैनाती की गई है। ताकि मरीजों को इलाज मिल सके।
विज्ञापन

डॉ. मधु वाजपेई, प्रभारी मुख्य जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें