हरदोई। मक्का उपजाने वाले किसानों को ये सीजन खासी चोट दे गया। दो साल बाद इस बार जब बाजार में मक्के का भाव अप्रत्याशित रूप से गिर गया तो किसानों को मक्के की सरकारी खरीद की याद आई, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिल सकी। दो साल खरीद अच्छी न होने पर सरकार ने इस बार मक्के की सरकारी खरीद से हाथ खींच लिए। ऐसे में किसानों को मजबूरन 800 से 900 रुपये क्विंटल में फसल बेचनी पड़ रही है।
जनपद में इस बार लगभग 35 हजार हेक्टेयर में मक्के की फसल उपजाई गई है। फसल भी अच्छी हुई है, लेकिन किसानों की मेहनत पर पानी फिरता दिख रहा है।
बाजार में मक्के का भाव कई साल की तुलना में इस बार न्यूनतम स्तर पर है। 2019-20 में जहां खुले बाजार में मक्के का भाव 1500 से 1600 रुपये तक था, वहीं इस बार मंडी में अच्छा मक्का बमुश्किल 800 से 900 रुपये क्विंटल तक बिक रहा है। बाजार में अच्छा भाव न मिलने पर किसानों को सरकारी क्रय केंद्रों से खासी उम्मीद थी, लेकिन इस बार सरकार ने भी किसानों को दगा दे दिया। जिन किसानों के पास भंडारण की सुविधा नहीं है, उन्हें फसल आधे दामों पर बेचनी पड़ रही है।
पिछले साल निल रहा था खरीद का आंकड़ा
2018-19 में सरकार द्वारा मक्का की सरकारी खरीद का निर्णय लिया गया था। सरकार की ओर से 1700 रुपये क्विंटल न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित था। 2018-19 में जनपद में हरदोई, माधौगंज, संडीला, शाहाबाद, सांडी व पिहानी मंडी में कुल छह क्रय केंद्र खोले गए थे। इन केंद्रों पर निर्धारित लक्ष्य 6500 मीट्रिक टन की जगह मात्र 965 मीट्रिक टन मक्का की खरीद की गई थी। जबकि वर्ष 2019-20 में जनपद में इन्हीं स्थानों पर छह क्रय केंद्र खोले गए। सरकार द्वारा मक्के का समर्थन मूल्य बढ़ाकर 1760 रुपये कर दिया गया, लेकिन खरीद का आंकड़ा निल रहा।
कंपनियों व पोल्ट्री फार्म से डिमांड न होने से भी बदले हालात
अन्य प्रांतों में संचालित पोल्ट्री फार्म में मक्का मुर्गियों व चूजों के दाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। दिल्ली समेत अन्य कई जगह मक्के से विभिन्न उत्पाद बनाए जाने के कारखाने हैं। कोरोना काल में व्यवसाय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इसका असर मक्का कारोबार पर भी दिख रहा है। बाहर से व्यापारियों की डिमांड काफी कम है, जिसके कारण बाजार भाव कम चल रहा है। मंडी के व्यापारियों का कहना है कि जैसे डिमांड बढ़ेगी, बाजार भाव में भी बढ़ोतरी होगी।
विकल्प न होने से बढ़ गई समस्या
मल्लावां के ग्राम तेरिया निवासी किसान राजबहादुर ने बताया कि इस बार किसानों को मक्के की फसल से काफी अपेक्षाएं थीं। फसल भी अच्छी हुई है, लेकिन बाजार धोखा दे गया। मंडी में मक्के का भाव कम होने पर लोगों के पास सरकारी क्रय केंद्रों पर उपज बेचने का विकल्प था, लेकिन इस बार केंद्र ही नहीं खुले।
किसान मनोज राठौर ने बताया कि गत वर्ष व उसके पहले बाजार में मक्के का भाव 1500 से 1600 तक रहा था। जिसके चलते किसानों को अच्छा लाभ हुआ। इस बार भी अच्छे लाभ की उम्मीद में किसानों ने मक्के की फसल उपजाई, लेकिन बाजार में भाव काफी कम है, जिसके कारण नुकसान का सामना करना पड़ा।
ग्राम परमी फुलई निवासी किसान राजेंद्र कुमार शुक्ला ने बताया कि किसानों को इस बार मक्का की सरकारी खरीद का बेसब्री से इंतजार था, लेकिन खरीद को लेकर कोई निर्णय नहीं हुआ। कहा कि जिन किसानों के पास व्यवस्था है, उन्होंने मक्का भंडारित कर लिया है। जबकि अन्य किसानों ने औने पौने दामों पर ही अपनी उपज बेच दी है।
नवीन गल्ला मंडी के व्यापारी रामशरण गुप्ता ने बताया कि इस बार मक्के का कारोबार खासी मंदी पर है। बाजार में भाव कम होने पर नाम मात्र की ही आवक है। बताया कि बाजार की ऐसी स्थिति बाहर मक्के की डिमांड न होने के कारण है। अगर डिमांड बढ़ी तो भाव में भी वृद्धि होगी।
नवीन गल्ला मंडी के व्यापारी राजेश गुप्ता ने बताया कि पोल्ट्री फार्म पर पर दाने के लिए व बाहर प्रांतों में लगे मक्का आधारित उद्योगों के चलते मक्के की खासी डिमांड रहती थी। लॉकडाउन में बड़े प्रोजेक्ट या तो बंद हैं या उनमें क्षमता अनुरूप काम नहीं हो पा रहा है। पोल्ट्री फार्म का काम भी प्रभावित चल रहा है, इसीलिए डिमांड घटी है।