हरदोई। शहर कोतवाली क्षेत्र के एक निजी अस्पताल में भर्ती प्रसूता की सोमवार को उपचार के दौरान मौत हो गई। नवजात पुत्र सुरक्षित है। परिजन ने निजी अस्पताल के डॉक्टरों पर उपचार में लापरवाही का आरोप लगाते हुए देर रात जिंदपीर चौराहे पर विरोध जताने का प्रयास किया लेकिन पुलिस ने समझा-बुझाकर मामला शांत करवा दिया। शव को कब्जे में लेकर पुलिस ने मंगलवार को पोस्टमार्टम कराया।
पाली थाना क्षेत्र के गुरधारी निवासी प्रमोद कुमार वाजपेयी की पत्नी रुचि (35) गर्भवती थीं। प्रमोद ने बताया कि सोमवार सुबह लगभग 10 बजे प्रसव पीड़ा होने पर उन्होंने युवती को महिला अस्पताल में भर्ती कराया था। चिकित्सकों ने उन्हें बताया कि छठा प्रसव होने के कारण रुचि का ऑपरेशन करना पड़ेगा।
आरोप है कि इसके बाद आशा उन्हें शहर के गिप्सनगंज स्थित एक प्राइवेट अस्पताल ले गईं। यहां शाम साढ़े पांच बजे ऑपरेशन से प्रसव हुआ। बेटे का जन्म होने के बाद रुचि को ऑपरेशन थिएटर से वापस नहीं लाया गया। करीब पौन घंटे बाद चिकित्सक ने रुचि की हालत गंभीर बताते हुए लखनऊ रेफर कर दिया। अस्पताल की एंबुलेंस से ही वह लखनऊ के एक प्राइवेट अस्पताल गए।
यहां चिकित्सकों ने बताया कि रुचि की मौत दो घंटे पहले ही हो चुकी है। रात करीब 10 बजे परिजन शव लेकर हरदोई लौटे और जिंदपीर चौराहे पर विरोध जताने का प्रयास किया लेकिन पुलिस ने उन्हें समझाकर शांत करा दिया। शहर कोतवाल संजय त्यागी ने बताया कि शव का मंगलवार को पोस्टमार्टम कराया गया। अस्पताल में भी पूछताछ की गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
अस्पताल से कागज न देने का दावा
प्रमोद कुमार ने बताया कि पुलिस के साथ वह रात में निजी अस्पताल गए थे और रेफर के कागज मांगे थे। आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन रेफर संबंधी कागजात उपलब्ध नहीं करा सके। बाद में शव को मेडिकल कॉलेज की मोर्चरी में रखवाया गया। परिजन ने आरोप लगाया कि निजी अस्पताल में प्रसव के दौरान सही उपचार नहीं किया गया। इस कारण रुचि की मौत हुई।