प्रदेश सरकार भले की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने
का दंभ भर रही हो, पर चिकित्सकों के बिना जिला अस्पताल में मरीजों का इलाज
संभव नहीं है। जिले में तैनात किए गए हृदय रोग विशेषज्ञ ने आज तक कार्यभार
ग्रहण नहीं किया। वहीं जिला अस्पताल में पचास फीसदी चिकित्सकों के पद रिक्त
है।
भीषण गर्मी और बारिश कम होने से संक्रामक रोग का प्रभाव बढ़ रहा, पर
इलाज करने के लिए फिजीशियन ही नहीं हैं, तो मरीजों का इलाज किस प्रकार होगा
इसका जवाब किसी के पास नहीं है। इसके अलावा जिला अस्पताल के चिकित्सक
मरीजों को दूसरी जगह के लिए रेफर कर अपने दायित्वों से पल्ला झाड़ रहे हैं।
ज्ञात हो कि जिला अस्पताल में वर्तमान में 26 पद चिकित्सकों के स्वीकृत
हैं, जिसमें से 13 पद रिक्त चल रहे हैं। जिला अस्पताल में कार्डियोलाजिस्ट
का पद कई वर्षों से रिक्त चल रहा है, पर अभी तक इस पद पर किसी भी विशेषज्ञ
डाक्टर की तैनाती नहीं की गई है, वहीं फिजीशियन के दोनों पद वर्षों से
रिक्त चल रहे हैं, जबकि बाल रोग विशेषज्ञ का एक पद भी रिक्त है।
इसके अलावा
तीन पद ईएमओ के भी रिक्त चल रहे हैं। इतना ही नहीं त्वचा रोग विशेषज्ञ के
पद पर वर्षों से तैनाती नहीं हुई, जबकि जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या
प्रतिदिन बढ़ रही है, पर उनको परामर्श और दवा के नाम पर कुछ गोली देकर
कार्य की इतिश्री कर ली जाती है।
इससे मरीजों को निजी चिकित्सकों की शरण
में जाना पड़ रहा। उधर, जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों का इलाज करने के
स्थान पर यहां पर तैनात चिकित्सक विशेषज्ञ न होने की बात कहकर लखनऊ रेफर
कर देते हैं। जिला अस्पताल के आंकड़ों की मानें, तो प्रति माह डेढ़ से दो
सौ मरीजों को बाहर का रास्ता दिखाया जाता है।
इसमें से कई की रास्ते में ही
मौत हो गई। उधर, जिला अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ के रिक्त पद पर
डाक्टर रुद्रदत्त द्विवेदी का 3 अप्रैल 13 को स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय
स्वास्थ्य भवन लखनऊ से स्थानांतरण किया गया था, पर आज तक उन्होंने कार्यभार
ग्रहण नहीं किया है। इससे जिला अस्पताल में आने वाले हृदय रोग के मरीजों
को भटकना पड़ता है।