हरदोई। मेडिकल कॉलेज में फिलहाल बिजली की आवाजाही की समस्या दूर नहीं हो पाएगी। बिजली गुल होने पर इनवर्टर और जनरेटर जैसे वैकल्पिक साधनों से रोशनी तो हो जाएगी, लेकिन अत्याधुनिक मशीनें नहीं चल पाएंगी।
दरअसल मेडिकल कॉलेज तो नया है, लेकिन इसे बिजली आपूर्ति करने वाला सब स्टेशन पुराना ही है, जोकि लोड नहीं उठा रहा है। वहीं, आईपीडी परिसर में नए सब स्टेशन का भवन तो बन गया, लेकिन मशीनें नहीं लग पाईं।
मेडिकल कॉलेज दो हिस्सों में बना है। एकेडमिक ब्लॉक, हॉस्टल और प्राचार्य आवास समेत अधिकांश भवन सीतापुर रोड पर गौरा डांडा में बने हैं। वहीं, ओपीडी, आईपीडी और महिला अस्पताल शहर में स्थित पुराने जिला अस्पताल परिसर में हैं। इसे भी अपग्रेड कर मेडिकल कॉलेज बना दिया गया है। यहां नया ओपीडी भवन बन चुका है और आईपीडी भवन को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है।
पिछले कई दिनों से मेडिकल कॉलेज की बिजली आपूर्ति प्रभावित हो रही है। इसके कारण कभी सीटी स्कैन मशीन का साफ्टवेयर खराब हो जाता है तो कभी पानी तक के लिए मरीजों को परेशान होना पड़ता है। इसकी वजह यह बताई जा रही कि परिसर में बिजली की आपूर्ति के लिए 200 केवीए का ही सब स्टेशन है।
पूर्व में जब जिला अस्पताल ही था तो यह सब स्टेशन बिजली के लिए पर्याप्त होता था, लेकिन मेडिकल कॉलेज बन जाने से बिजली का लोड काफी बढ़ गया है। इसके लिए अब 500 केवीए के विद्युत सब स्टेशन की दरकार है। तभी यहां की बिजली आपूर्ति व्यवस्था दुरुस्त हो पाएगी।
सब स्टेशन के लिए छह करोड़ मिले पर कार्यदायी संस्था में रार
मेडिकल कॉलेज से जुड़े सूत्र बताते हैं कि 500 केवीए का नया विद्युत सब स्टेशन बनाने के लिए शासन ने छह करोड़ रुपये स्वीकृत कर दिए हैं। इस बजट से 360 केवीए का एक जनरेटर भी स्थापित किया जाना है। मामला दरअसल इसलिए फंसा है कि मेडिकल कॉलेज भवन का निर्माण राजकीय निर्माण निगम (आरएनएन) ने कराया है, जबकि सब स्टेशन बनाने के लिए यूपीपीसीएल को कार्यदायी संस्था नामित कर दिया गया है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन से जुड़े अधिकांश लोग चाहते हैं कि आरएनएन से ही यह कार्य भी कराया जाए ताकि कहीं कोई चूक न हो।
मेडिकल कॉलेज में कई नई अत्याधुनिक मशीनें लगी हैं। नई इमारतें भी काफी बड़ी हैं। इसलिए बिजली का लोड बढ़ गया है। नया सब स्टेशन बन जाएगा, तो समस्या बिल्कुल दूर हो जाएगी। शासन से बजट मिला है। कार्यदायी संस्था को लेकर शासन को पत्र भेजा गया है। जल्द से जल्द कार्य कराने की कोशिश की जा रही है।
डा. आर्यदेश दीपक, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज