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15 माह, दो सीडीओ, सात पत्र, सत्यापन फिर भी नहीं

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हरदोई। मनरेगा की निगरानी के लिए डीएम जिला समन्वयक हैं, सीडीओ अपर जिला कार्यक्रम समन्वयक और फिर मनरेगा उपायुक्त की भी तैनाती है लेकिन एक साल से अधिक समय बीतने और अधिकारियों द्वारा पांच पत्र लिखने के बाद भी मनरेगा के तहत कार्य करने वाले वेंडरों का सत्यापन नहीं हो पाया है। इससे ऐसा लगता है कि मातहत अफसरों को तरजीह नहीं दे रहे। अब छठवां पत्र भी जारी किया गया है। वहीं इन वेंडरों को आपूर्ति के लिए भुगतान भी हो रहा है।
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मनरेगा के तहत दो हिस्सों में कार्य कराया जाता है। श्रमांश और सामग्री अंश। श्रमांश के तहत मनरेगा में कार्य करने वाले मजदूरों को भुगतान दिया जाता है। विकास कार्य कराने में मजदूरी के साथ-साथ सामग्री भी लगती है। इस सामग्री की आपूर्ति करने वाली फर्म को सामग्री अंश के तहत भुगतान होता है। मनरेगा के नियमों के मुताबिक सामग्री खरीदने के लिए कुछ फर्में जिन्हें विभागीय बोलचाल की भाषा में वेंडर कहते हैं, का पंजीकरण कराना होता है। यह पंजीकरण मनरेगा की वेबसाइट पर होता है। पंजीकृत वेंडरों को ही भुगतान किया जाता है। प्रदेश के कुछ जनपदों में ऐसे मामले सामने आए थे, जहां वेंडर का सिर्फ पंजीकरण था, न तो दुकान थी और न ही गोदाम। इसके बाद शासन ने पूरे प्रदेश मेें वेंडरों के सत्यापन के निर्देश दिए।
शासन के निर्देशों के क्रम में जिले की तत्कालीन मु़ख्य विकास अधिकारी निधी गुप्ता वत्स ने 20 अगस्त 2020 को वेंडरों का सत्यापन कराने का आदेश जारी किया था। एक पखवारे के अंदर रिपोर्ट देने को कहा गया, लेकिन किसी भी ब्लॉक से सत्यापन रिपोर्ट नहीं आई। इसके बाद से अब तक अलग-अलग तारीखों में पांच पत्र सभी खंड विकास अधिकारियों को भेजे जा चुके हैं। मुख्य विकास अधिकारी आकांक्षा राना ने मनरेगा के अपर जिला कार्यक्रम समन्वयक की हैसियत से यह पत्र भेजे हैं। इन पत्रों में हर बार सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी जाती है, लेकिन फिर अगला पत्र जारी कर औपचारिकता पूरी हो जाती है।
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इन तारीखों पर जारी हुए पत्र
-31 अगस्त 2020
-7 नवंबर 2020
-18 फरवरी 2021
-1 जुलाई 2021
-31 अगस्त 2021
नहीं हुआ सत्यापन कार्य
खंड विकास अधिकारी और उनके मातहत सीडीओ के निर्देशों की अनदेखी करते हैं, तो मनरेगा उपायुक्त भी इसमें पीछे नहीं हैं। मनरेगा उपायुक्त प्रमोद सिंह चंद्रौल पूर्व में माधौगंज के खंड विकास अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार संभाल चुके हैं और इन दिनों मल्लावां के बीडीओ का प्रभार संभाल रहे हैं। इन दोनों ब्लाकों में भी वेंडर सत्यापन का कार्य नहीं हुआ है।
भेजी गोलमाल रिपोर्ट
19 विकास खंडों में से सिर्फ टोडरपुर विकास खंड ने वेंडर सत्यापन की कार्यवाही पूरी करने का दावा करते हुए रिपोर्ट आलाधिकारियों को भेजी, लेकिन यह रिपोर्ट भी गोलमोल थी। सत्यापन में जो बिंदु शामिल करने थे वह किए ही नहीं, लेकिन औपचारिकता पूरी करने को रिपोर्ट भेज दी।
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इन बिंदुओं पर होना है सत्यापन
जीएसटी नंबर, उसकी वैद्यता, आयकर पंजीकरण, आधार और स्थानीय पते के दस्तावेज
फर्म का संचालन उल्लेखित पते पर हो रहा है या नहीं
वेेंडर/ फर्म के अस्तित्व, कार्य पद्धति और कार्य का स्थलीय निरीक्षण
तो झेलेंगे बीडीओ ही
सीडीओ आकांक्षा राना ने सभी बीडीओ को लिखे पत्र में एक महत्वपूर्ण बिंदु लिखा है। विकास विभाग के कर्मचारियों और मनरेगा कर्मियों ने अपने या अपने परिजनों की फर्म बनवा रखी हैं। कुछ फर्म तो छदम नामों से पंजीकृत हैं, जो केवल कागजों में ही संचालित हैं। ऐसा कोई प्रकरण सामने आया तो जिम्मेदारी कर्मचारी के साथ-साथ खंड विकास अधिकारी की भी होगी।
करोड़ों रुपये का होता है सामग्री अंश पर भुगतान
सामग्री अंश पर मनेरगा के तहत कई करोड़ रुपये का भुगतान हर वित्तीय वर्ष में होता है। चालू वित्तीय वर्ष यानी वर्ष 2021-22 में अब तक 11,96,23,000 रुपये का भुगतान विभिन्न फर्मों को किया जा चुका है।
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किस ब्लाक मेें कितने वेंडर और कितना हुआ भुगतान
ब्लाक वेेंडर भुगतान (लाख रुपये)
अहिरोरी 3 5.1
बावन 25 23.72
बेंहदर 7 7.39
भरावन 19 17.19
भरखनी 67 189.99
बिलग्राम 9 11.64
हरियावां 11 31.08
हरपालपुर 8 14.15
कछौना 4 8.64
कोथावां 14 26.25
माधौगंज 16 24.79
मल्लावां 3 2.06
पिहानी 18 12.13
सांडी 25 28.04
संडीला 24 87.16
शाहाबाद 47 386.21
सुरसा 42 214.65
टडिय़ावां 5 1.87
टोडरपुर 24 104.17
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