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लोक अदालत : बिखरते रिश्ते बचे, कर्ज से राहत की राह भी निकली

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फोटो-01- लोक अदालत में लगे शिविर में वादों का निस्तारण करते बैंक के अधिकारी। संवाद - फोटो : संयुक्त चिकित्सालय में उपचार करवाता घायल युवक। स्रोत संवाद
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हरदोई। दीवानी न्यायालय परिसर शनिवार को बिखरते रिश्तों को बचाने का गवाह बना। कर्ज से दबे किसान को बुढ़ापे में राहत की राह भी दीवानी न्यायालय परिसर से मिली। दरअसल शनिवार को लोक अदालत का आयोजन हुआ। आपसी सुलह-समझौते से इस दौरान बड़ी संख्या में मामले निस्तारित हो गए। आयोजन का शुभारंभ जिला जज रीता कौशिक ने सरस्वती प्रतिमा पर दीप जलाकर किया। उन्होंने कहा कि लोक अदालत का उद्देश्य आपसी सहमति से विवादों का निस्तारण कराना है। यहां न कोई हारता है और न कोई जीतता है। दोनों पक्ष सम्मान पूर्वक समाधान तक पहुंचते हैं।
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केस एक

जज ने समझाया पारिवारिक मूल्य तो छह साल पुराना विवाद सुलझा

मल्लावां कोतवाली क्षेत्र की एक महिला ने 28 सितंबर 2020 को गुजारा भत्ता का वाद दायर किया था। आरोप था कि संडीला निवासी पति और ससुरालीजन दहेज की मांग करते हैं। मांग पूरी न होने पर दो सितंबर 2020 को पीटकर घर से निकाल दिया था। प्रधान न्यायाधीश महेंद्र नाथ ने दोनों पक्षों को समझाकर पारिवारिक मूल्यों का हवाला दिया। लंबी बातचीत के बाद पति-पत्नी साथ रहने को तैयार हो गए और छह साल पुराना विवाद फिलहाल खत्म हो गया।



केस दो

21 साल से कर्ज के बोझ में दबे मखमूल को मिली राहत

बिलग्राम कोतवाली क्षेत्र के जरसेनामऊ निवासी मखमूल ने वर्ष 2005 में ट्रैक्टर खरीदने के लिए यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से लोन लिया था। आर्थिक समस्या के कारण वह किस्तें जमा नहीं कर सके। ब्याज बढ़ते-बढ़ते उन पर पांच लाख रुपये का बकाया हो गया। लोक अदालत में मखमूल ने कहा कि ट्रैक्टर पूरी तरह खत्म हो चुका है। पूरी रकम जमा करने में सक्षम नहीं हैं। बैंक प्रबंधक हरीशचंद्र और यूपी क्षेत्र प्रमुख विकास कुमार ने मामले पर विचार किया। पूरा विवाद 35 हजार रुपये जमा करने की सहमति पर खत्म हो गया। बुजुर्ग के चेहरे पर भी राहत नजर आई।
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केस तीन

15 साल पहले लिए ऋण का मामला तीन हजार रुपये में सुलझा

शहर के आशानगर निवासी पारुल त्रिपाठी ने वर्ष 2011 में ब्यूटी पार्लर के लिए 50 हजार रुपये का लोन लिया था। कुछ ऋण लौटा भी दिया था। कारोबार में अपेक्षित लाभ न मिलने से वह ऋण अदा नहीं कर पाईं। ब्याज बढ़ने के बाद बकाया 28 हजार रुपये हो गया। इंडियन बैंक के मुख्य शाखा प्रबंधक सनविजय सिंह के सामने यह मामला शनिवार को महज तीन हजार रुपये में निस्तारित हो गया।



केस चार

छह साल पहले हादसे में हुई थी सफाईकमी की मौत, अब परिजनों को मिलेंगे 26 लाख रुपये

सांडी थाना क्षेत्र के घटकना गांव निवासी किरण चंद्रा ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में पांच फरवरी 2020 को वाद दायर कर बताया था कि उनके पति मुकेश कुमार सफाईकर्मी थे। ड्यूटी से गांव लौटते समय दो जनवरी 2019 को लखपेड़ा मेला के पास बाइक सवार सुमित गुप्ता ने टक्कर मार दी थी। घटना में मुकेश की मौके पर ही मौत हो गई थी। बाइक का बीमा यूनाइटेड इंश्योरेंस कंपनी से था। लोक अदालत में दोनों पक्षों के बीच वार्ता कराई। इंश्योरेंस कंपनी ने 26 लाख रुपये का मुआवजा देने पर सहमति दी तो मामले का निस्तारण हो गया।





हथकरघा के टॉवल और रुमाल बने आकर्षण का केंद्र

लोक अदालत के दौरान यहां हथकरघा विभाग की ओर से स्टॉल भी लगाए गए। मल्लावां क्षेत्र में बने टॉवल और रुमाल यहां आकर्षण का केंद्र बने रहे। जिला जज रीता कौशिक ने नोडल अधिकारी भूपेंद्र प्रताप, विधिक सेवा प्राधिकरण की प्रभारी सचिव एवं सिविल जज सीनियर डिवीजन स्मिता गोस्वामी तथा सीजेएम ऋचा वर्मा के साथ स्टॉल का जायजा लिया। न्यायिक अधिकारियों ने खरीदारी भी की।
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