बढ़ा खतरा, 44 फीसदी बच्चों को नहीं लगा हेपेटाइटिस-बी का टीका
- जन्म के एक से दो वर्ष तक के बच्चों में बीमारियों से बचाव के लिए होता है टीकाकरण
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। सरकारी अस्पताल में प्रसव के बाद नवजात शिशुओं को हेपेटाइटिस-बी सहित अन्य टीके नहीं लग पा रहे हैं। शिशुओं के जन्म पर हैपेटाइटिस-बी का टीका लगाया जाता है। इसके डेढ़ माह में निमोनिया, रोटा वायरस और इनएक्टिवेट पोलियो वायरस का टीका लगाया जाता है।
नियमित टीकाकरण अभियान के तहत केवल 55.67 प्रतिशत ही बच्चों तक ही हेपेटाइटिस-बी की खुराक पहुंच रही है, जबकि 44 फीसदी से अधिक नवजात टीके से वंचित हैं। जिसके चलते प्रसूताओं और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की टीकाकरण रिपोर्ट में कहा गया है कि चालू वित्तीय वर्ष में 1,37,496 संस्थागत प्रसव हुए हैं। इनमें से 76,554 बच्चों को ही हैपेटाइटिस-बी बर्थ डोज दी गई है। ऐसे ही एक साल आयु वर्ग के 1,28,766 बच्चों के टीकाकरण का लक्ष्य रखा गया है। इसमें फरवरी तक 87,848 बच्चों को क्षय रोग से बचाव के लिए बैसिलस कैलमेट-गुएरिन (बीसीजी), 1,03,229 ओरल पोलियो वायरस वैक्सीन (ओपीवी-वन), 1,02,317 बच्चों को पेंटावेलेंट-वन, 99,922 बच्चों को पेंटावेलेंट-टू और 99,608 बच्चों को पेंटावेलेंट-थ्री और 1,03,163 बच्चों को एमआर-वन और 1,01,420 बच्चों को जापानी इंसेफ्लाइटिस (जेई-वन) टीका लगाया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि एक से दो साल आयु वर्ग के बच्चों में 96,348 बच्चों को जेई की द्वितीय डोज, 98,776 बच्चों को एमआर कली द्वितीय डोल, 99,039 बच्चों को डिप्थीरिया पर्टुसिस टेटनेस (डीपीटी) प्रथम बूस्टर डोज, 1,02,363 बच्चों को डीपीटी द्वितीय बूस्टर डोज दी गई है।
सीएमओ डॉ. राजेश कुमार तिवारी ने बताया कि टीकाकरण प्रभारी के साथ ही सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारियों को टीकाकरण की स्थिति में सुधार लाने को कहा गया है।
हेपेटाइटिस-बी की कमी से फैलती ये बीमारियां
- डार्क मूत्र, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द थकान व बुखार, भूख में कमी, पेट में दर्द, आंखों व त्वचा के सफेद हिस्से का पीला पड़ना