हरदोई। शहर में अंबेडकर पार्क के पीछे स्थित तालाब के निर्माण में लगे अनियमितता के आरोपों की जांच बुधवार को हुई। लोकायुक्त के निर्देश पर आई टीम में शामिल सीतापुरकी ज्वाइंट मजिस्ट्रेट एस दामिनी दास ने पूछा कि तालाब से निकली मिट्टी कहां गई। हिम्मत जुटाकर एक कर्मचारी ने कहा कि पाथवे बनाने में इस्तेमाल हुई है। इस पर फिर सवाल आया कि मिट्टी के नाम पर फिर चालीस लाख रुपये कहां खर्च हुए। इसके बाद जिम्मेदारों की बोलती बंद हो गई।
नगर पालिका ने वर्ष 2018 में अंबेडकर पार्क के पीछे स्थित तालाब के सौँदर्यीकरण की शुरूआत कराई थी। इसके लिए तालाब की खोदाई कराई गई थी। खोदाई के दौरान पहले सिल्ट और फिर बड़े पैमाने पर मिट्टी निकली थी। वरिष्ठ पत्रकार ब्रजेश श्रीवास्तव ने तालाब के सौंदर्यीकरण के दौरान बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं किए जाने का आरोप लगाते हुए लोकायुक्त से शिकायत दर्ज कराई थी। इस पर लोकायुक्त ने जांच के लिए टीम गठित करदी।
टीम में सीतापुर के एडीएम नितीश कुमार सिंह, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट एस दामिनी दास समेत कई अधिकारी शामिल हैं। इस टीम ने बुधवार को मौके का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान तत्कालीन अधिशासी अधिकारी रवि शंकर शुक्ला और नगर पालिका अध्यक्ष सुख सागर मिश्र मधुर भी मौजूद रहे। नगर पालिका के कर्मचारियों से तालाब में कराए गए कार्याें के बारे में जानकारी ली गई। इसी दौरान ज्वाइंट मजिस्ट्रेट एस दामिनी दास ने पूछा कि इंटरलॉकिंग लगाए जाने पर 26 लाख रुपये कैसे खर्च हो गए। इसके बाद कई सवाल उन्होंने किए, जिनके जवाब जिम्मेदार नहीं दे पाए।
अफसर गए पर नाप जोख के लिए टीम रुकी
विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि जांच के बाद टीम में शामिल अधिकारी वापस चले गए। इन अधिकारियों ने कुछ कर्मचारियों को हरदोई में ही रोक दिया है। यह लोग तालाब से निकली अनुमानित मिट्टी, कराए गए कार्य आदि की नाप जोख करेंगे। पूरे मामले पर अपर जिलाधिकारी सीतापुर नितीश कुमार सिंह ने कहा कि जांच रिपोर्ट शासन के माध्यम से लोकायुक्त को भेजी जाएगी।
कई बार निकले टेंडर, हर बार बदल जाता था काम का नाम
नगर पालिका से जुड़े विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि उक्त काम का टेंडर कई बार निकला। हर बार काम का नाम और तरीका बदल जाता था। जिस मामले की जांच हुई है उस कार्य पर 66 लाख रुपये खर्च हुए थे। तब काम निकालते समय तालाब को लोक निर्माण विभाग के निरीक्षण भवन के सामने बताया गया था। बाद में निकले टेंडरों में इसे अंबेडकर पार्क के पीछे बताया गया। एक टेंडर में इस काम को बाबू श्रीश चंद्र अग्रवाल बरात घर के सामने बताया गया।