संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। हिंदी दिवस पर गुरुवार को शैक्षिक संस्थानों व समाजसेवी संस्थानों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित हुए। इसमें वक्ताओं ने हिंदी भाषा के महत्व को बताया। कार्यक्रम में सीएसएन महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. केके सिंह ने हिंदी को भारत माता की माथे की बिंदी कहा।
महाविद्यालय के सभागार में हिंदी दिवस समारोह का शुभारंभ प्राचार्य प्रो. केके सिंह मां सरस्वती के चित्र के सामने दीप प्रज्जवलित कर किया। उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा में ही कबीर, सूर, तुलसी व मीरा जैसे महान कवियों ने ज्ञान, भक्ति और प्रेम का संदेश दिया और हिंदी में ही भारतेंदु, निराला, दिनकर व बालकृष्ण शर्मा नवीन जैसे लोगों ने आजादी के गीत गाए हैं।
प्रो. साधना शुक्ला ने कहा हिंदी हमारी आत्मा है, इसमें हम कजली, आल्हा, होली वह विवाह के गीत गाते हैं। हिंदी के उत्थान के लिए भी देशवासियों को साथ मिलकर प्रयास करना चाहिए। कृतार्थ पाठक, अनमोल शुक्ला, मिथुन कुमार, अंजली सिंह, अंजली मिश्रा, अर्चना पांडे, रौनक शर्मा, नेहल शुक्ला, सीताराम मिश्रा, राम जी गुप्ता, राम जी कश्यप, शिल्पी, हर्ष मिश्रा आदि विद्यार्थियों ने विचार व्यक्त किए।
संचालन डॉ. दीपक कुमार राय ने किया। प्रो. संदीप कुमार सिन्हा, पुष्पा रानी गंगवार, राकेश सिंह, जेएस चौहान, डॉ. अरुण मौर्य मौजूद रहे। श्री सरस्वती सदन में हिंदी दिवस समारोह कार्यक्रम के अंतिम दिन हिंदी की वैश्विक स्वीकार्यता पर व्याखान माला हुई।
डाॅ. तारकेश्वर गुप्ता ने कहा कि भारत की हिंदी को स्वीकार करना वैश्विक मजबूरी है। बहुराष्ट्रीय कंपनियों को अपना उत्पाद बेचने और विज्ञापन के प्रचार के लिए हिंदी का 90 प्रतिशत का प्रयोग करना पड़ रहा है। एसएन अग्निहोत्री ने कहा कि भाषा राष्ट्र का गौरव होती है। हिंदी भाषियों को उसके भविष्य के प्रति सचेत रहना चाहिए।
श्रवण मिश्र ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। सदन अध्यक्ष अरुणेश वाजपेयी ने अतिथियों का स्वागत किया। संचालन महेश मिश्र ने किया। मंत्री मनीष कुमार मिश्र, अनिल श्रीवास्तव,सीमा मिश्रा,अखिलेश वाजपेयी, वीडी शुक्ला, डाॅ. अमित कुमार वर्मा मौजूद रहे।
एसडी इंटर काॅलेज में हिंदी दिवस पर कार्यक्रम में छात्र अर्पित अवस्थी ने हिंदी की महत्ता पर प्रकाश डाला। हिंदी शिक्षक देवेश पांडेय ने कहा हमारी भारतीय संस्कृति तभी सुरक्षित रह सकती है, जब हम अपनी मातृभाषा पर गर्व करेंगे। प्रीति सिंह,राजीव यादव, सत्यम दीक्षित ने भी विचार व्यक्त किए। अर्पित, शिवा, मोनू निखिल, दुर्गेश ने निबंध प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया। अभिषेक अग्निहोत्री, नीलम, अनिल पाल, सर्वेश शुक्ल, विधानचंद्र दि्वेदी मौजूद रहे।