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डेंगू पीड़ितों की जान जा रही, स्वास्थ्य महकमा मानने को तैयार नहीं

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जिला चिकित्सालय में डेंगू वार्ड में भर्ती मरीज और मौजूद तीमारदार। संवाद - फोटो : HARDOI
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हरदोई। जनपद में डेंगू का कहर बढ़ता जा रहा है। डेंगू पीड़ितों की मौत की जानकारी लगभग हर रोज अलग-अलग इलाकों से आ रही है, लेकिन स्वास्थ्य महकमे के जिम्मेदार इसे मानने को तैयार नहीं हैं। जिम्मेदार जिले में डेंगू से मौत की बात को स्वीकार नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि जिन लोगों की मौत हुई, उन्हें अन्य बीमारियां थीं।
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शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक में डेंगू का डंक मुसीबत बना हुआ है। लेकिन डेंगू पीड़ितों की वास्तविक संख्या भी बताने में महकमा हिचक रहा है और गलत रिपोर्टिंग कर रहा है। स्वास्थ्य विभाग सिर्फ सरकारी पैथोलॉजी की लैब रिपोर्ट तक ही सिमटा है। जिला अस्पताल में होने वाली डेंगू की जांच में पॉजिटिव मिलने वाले मरीजों की जानकारी ही स्वास्थ्य विभाग जनपद के आला प्रशासनिक अधिकारियों को देता है। बड़ी संख्या में ग्रामीण इलाकों से लेकर जिला मुख्यालय तक संचालित पैथोलॉजी में होने वाली डेंगू की जांचें और पॉजिटिव मरीजों का आंकड़ा लगता है कि स्वास्थ्य महकमे के पास नहीं है या इस पर पर्दा डाला जा रहा है।
शहर के आवास विकास कालोनी निवासी विशाल खरे (32) को पिछले कुछ दिन से बुखार आ रहा था। शनिवार को शहर के एक प्राइवेट नर्सिंग होम की लैब में जांच हुई, तो डेंगू से पीड़ित होने की पुष्टि हुई। परिजन आनन-फानन ही लखनऊ के एक नामी प्राइवेट अस्पताल में विशाल को ले गए लेकिन मंगलवार को लखनऊ में ही उसका निधन हो गया।
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शहर के न्यू सिविल लाइंस निवासी अरुणा तिवारी उर्फ स्वाती तिवारी (55) की हालत 12 अक्टूबर को ज्यादा बिगड़ने पर परिजनों ने शहर के एक प्राइवेट अस्पताल में दिखाया। उन्हें लखनऊ रेफर किया गया। लखनऊ में 12 अक्टूबर की शाम ही डेंगू से पीड़ित होने की पुष्टि हुई। लखनऊ के एक प्राइवेट अस्पताल में 13 अक्टूबर को स्वाती की मौत हो गई।
बिलग्राम कस्बा निवासी प्रमोद कुमार कुशवाहा की पुत्री प्रतिज्ञा (22) को कई दिन बुखार आया। परिजनों ने सीएचसी में उसकी डेंगू की जांच कराई। परिजनों का कहना है कि डेंगू पॉजिटिव आने पर उसे सीएचसी में ही भर्ती कर लिया गया। कुछ देर बाद हालत बिगड़ने पर रेफर कर दिया गया। नर्सिंग होम में उपचार के दौरान एक अक्टूबर की रात ही प्रतिज्ञा की मौत हो गई।
यह है विभाग का दावा
सीएमओ डॉ. एसएम त्रिपाठी का दावा है कि जनपद में अब तक डेंगू के कुल 128 मामले सामने आए हैं। इनमें से 14 मरीज अस्पताल में भर्ती हैं, जबकि 114 मरीज घरों पर ही इलाज करा रहे हैं। जिला चिकित्सालय में डेंगू के मरीजों के लिए दस बेड का वार्ड बना है और सभी सीएचसी पर पांच- पांच बेड की व्यवस्था भी डेंगू पीड़ित मरीजों के लिए की गई है।
सीएमओ बोले, अन्य बीमारियों से पीड़ित थे मृतक
सीएमओ डॉ. एसएम त्रिपाठी ने कहा कि जनपद में डेंगू से एक भी मौत अब तक नहीं हुई है। बुखार पीड़ित की अस्पताल या घर में मौत की सूचना पर डेथ ऑडिट कराया जाता है। अब तक जिन मौतों की सूचना मिली उनके बारे में परिजनों से बात कर हकीकत मालूम की गई। पता चला कि जिन लोगों की मौत हुई, वह लोग अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित थे। सिर्फ डेंगू से पीड़ित होने के कारण ही किसी की मौत नहीं हुई है।
आंकड़ों पर यह बोले अफसर
जनपद में अब तक 128 डेंगू के मरीज मिलने लेकिन हर घर में डेंगू पीड़ित होने के सवाल पर सीएमओ डॉ. एसएम त्रिपाठी ने कहा कि डेंगू की एलाइजा जांच सिर्फ जिला चिकित्सालय की पैथोलॉजी में ही होती है। प्राइवेट पैथोलॉजी या अन्य सीएचसी पर डेंगू की एनएस-1 जांच कराई जाती है। जिनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आती है उनका एलाइजा टेस्ट जिला अस्पताल की लैब में कराया जाता है। एलाइजा टेस्ट में डेंगू पॉजिटिव आने पर ही संबंधित को डेंगू पीड़ित माना जाता है। उन्होंने दावा किया कि जरूरी नहीं कि एनएस-1 की जांच पॉजिटिव आने पर एलाइजा टेस्ट की रिपोर्ट भी पॉजिटिव आए।
यह है बचाव की व्यवस्था
डीएम अविनाश कुमार ने कहा कि टेस्टिंग के लिए कुल 22 टीमों को लगाया गया है। इसके अलावा नगरीय क्षेत्रों में कुल 243 वार्ड हैं। इन वार्डों में सफाई व्यवस्था के लिए 122 टीमें लगाई गई हैं। इन वार्डाें में एंटी लार्वा का छिड़काव कराया जा रहा है। लार्वा मिलने पर संबंधित लोगों को नोटिस भी दी जा रही है। ग्रामीण इलाकों में भी लगातार सफाई अभियान चलाया जा रहा है।
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