हरदोई। जनपद की मृतप्राय दुग्ध सहकारी समितियों और दुग्ध उत्पादक किसानों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की पहल मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) ने दुग्ध उपार्जन मिशन से शुरू की है। इसमें सबसे पहले बावन विकास खंड की 16 दुग्ध सहकारी समितियों को सक्रिय किया गया है। इससे रोजाना 1500 लीटर दूध का उपार्जन बढ़ा है।
जनपद में कभी 507 दुग्ध सहकारी समितियां सक्रिय थीं और दुग्ध उपार्जन भी साठ हजार लीटर तक हुआ करता था, लेकिन दुग्ध संघ के जिम्मेदारों की अनदेखी से हालात बिगड़ते चले गए। जनपद में दुग्ध उपार्जन घटकर 3500 लीटर ही रह गया।
दुग्ध उत्पादन से किसानों की आय बढ़ाने और दुग्ध सहकारी समितियों की भी दशा सुधारने के लिए सीडीओ आकांक्षा राना ने दुग्ध उपार्जन मिशन के तहत कार्य शुरू किए। इसी के तहत अब तक 16 समितियों को सक्रिय किया जा चुका है। अब 5500 लीटर दूध सहकारी समितियों से लिया जा रहा है। इसको 31 अगस्त तक दस हजार लीटर पहुंचाने के लक्ष्य पर अधिकारी कार्य कर रहे हैं।
उपार्जन मिशन की हर रोज हो रही निगरानी
सीडीओ आकांक्षा राना ने दुग्ध उपार्जन मिशन की निगरानी के लिए विशेष कमेटी गठित की है। कमेटी में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. जेएन पांडेय, उपनिदेशक कृषि डॉ. नंद किशोर और स्वत: रोजगार के उपायुक्त विपिन चौधरी शामिल हैं। तीनों ही अधिकारी आपस में समन्वय स्थापित कर हर रोज उपार्जन मिशन की समीक्षा करते हैं और इसकी जानकारी सीडीओ को देते हैं।
22 डीपीएमसीयू भी हो गईं दुरुस्त
सीडीओ ने जनपद में डीपीएमसीयू के संचालन में हो रही परेशानियों को लेकर शासन स्तर पर विस्तार से जनपद का पक्ष रखा। इसके बाद तकनीकी समस्याओं को दूर करने के लिए कई तकनीकी जानकार जनपद में भेजे गए। खराब मशीनों को दुरुस्त किया गया। दुग्ध संघ के प्रबंधक सुरेश यादव बताते हैं कि अब जनपद में 22 डाटा प्रोसेसिंग मिल्क कलेक्शन यूनिट सक्रिय हैं और सभी पर कार्य चल रहा है। इसके अलावा लखनऊ रोड स्थित दुग्ध संघ कार्यालय परिसर में तीन तीन हजार लीटर के दो बल्क मिल्क कूलर भी चल रहे हैं।
सीवीओ के अनुभव से पकड़ी बीमारी, होने लगा इलाज
जनपद में तैनात मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. जेएन पांडेय पूर्व में दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में लंबे समय तक सरकारी अधिकारी के तौर पर सेवाएं दे चुके हैं। जब दुग्ध उपार्जन मिशन पर कार्य शुरू हुआ, तो सीवीओ का अनुभव भी उपयोग में आया। दरअसल, जब जनपद के आलाधिकारियों ने यह विमर्श किया कि दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियां खस्ताहाल कैसे हुईं, तो पता चला कि दुग्ध संघ को दूध बेचने वाले पशु पालकों को भुगतान ही कई कई माह बाद मिलता है। इस पर विमर्श के बाद इसी बीमारी का इलाज शुरू करने का रास्ता निकाला गया और अब एक सप्ताह में हर पशुपालक को भुगतान की व्यवस्था कर दी गई है।
स्वयं सहायता समूह की महिलाएं भी जुड़ेंगी उपार्जन मिशन से
जनपद में बड़ी संख्या में स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं। समूह की महिलाएं पशु पालन भी करती हैं। पशु पालन करने वाले समूहों को भी दुग्ध उपार्जन मिशन से जोड़ने के निर्देश सीडीओ ने दिए हैं। इस कार्य के लिए स्वत: रोजगार के उपायुक्त विपिन चौधरी को लगाया गया है।