हरदोई। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव की सरगर्मियां तेज हो चली हैं। चुनाव लड़ने के इच्छुक दावेदारों ने अपनी अपनी पार्टी में चुनाव लड़ने के लिए आवेदन भी कर दिया है।
हालांकि अभी तक किसी भी पार्टी ने अपने प्रत्याशी की घोषणा नहीं की है, लेकिन माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में ही सपा और भाजपा अपने अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर देंगी।
जिला पंचायत अध्यक्ष का पद अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित है। भाजपा ने जिला पंचायत सदस्य के सभी 72 पदों पर अपने समर्थित प्रत्याशी मैदान में उतारे थे, लेकिन इनमें से 16 ही बाजी मार सके।
सत्ताधारी दल होने के कारण जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए टिकट के दावेदारों की सबसे ज्यादा मारामारी भले ही भाजपा में है, लेकिन पद आरक्षित होने के कारण फिलहाल दो लोगों ने ही चुनाव लड़ने के लिए आवेदन किया है।
बेसिक शिक्षा विभाग की नौकरी छोड़कर चुनाव में उतरकर जीत हासिल करने वाली प्रेमावती ने अध्यक्ष पद के लिए टिकट के लिए आवेदन किया है। वह भाजपा नेता पीके वर्मा की पत्नी हैं।
दूसरा आवेदन मीना वर्मा ने किया है। वह भाजपा की जिलामंत्री हैं और पूर्व में दो बार ग्राम प्रधान रह चुकी हैं। समाजवादी पार्टी के समर्थित प्रत्याशियों में से 14 ने जिला पंचायत सदस्य पद का चुनाव जीता है।
इसके अलावा चार ऐसे लोग भी चुनाव जीते हैं जिन्हें पार्टी समर्थित प्रत्याशी घोषित नहीं किया गया था, लेकिन ये लोग पार्टी में विभिन्न पदों पर कार्य कर रहे हैं।
सुरसा प्रथम क्षेत्र से निर्वाचित हुईं मुन्नी देवी गौतम ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने के लिए सपा से टिकट के लिए आवेदन किया है।
उधर बसपा जिलाध्यक्ष सुरेश चौधरी का दावा है कि बसपा समर्थित दस प्रत्याशी जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीते हैं। उनकी पार्टी को भी जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव लड़ने के लिए एक आवेदन मिला है, लेकिन नाम का खुलासा करने से उन्होंने इनकार कर दिया।
अनीता भी अध्यक्ष पद की हैं दावेदार
जिला पंचायत पूर्व अध्यक्ष अनीता वर्मा निर्दलीय ही जिला पंचायत सदस्य पद का चुनाव जीतने में सफल रही हैं। उन्हें भी जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में दावेदार माना जा रहा है। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक वह भाजपा से टिकट के लिए प्रयासरत भी हैं। भाजपा में भी एक खेमा उन्हें प्रत्याशी बनाए जाने का पक्षधर है।
दो दशक बाद अग्रवाल परिवार से बाहर जाएगा पद
जिला पंचायत अध्यक्ष का पद दो दशक बाद कद्दावर नेता नरेश अग्रवाल के परिवार से बाहर जाएगा। नरेश अग्रवाल के छोटे भाई मुकेश अग्रवाल वर्ष 2000 और 2005 में अध्यक्ष पद के लिए निर्वाचित हुए थे।
वर्ष 2010 के चुनाव में पद महिला के लिए आरक्षित होने पर मुकेश अग्रवाल की पत्नी कामिनी अग्रवाल निर्वाचित हुईं थीं। वर्ष 2015 में यह पद पिछड़ा वर्ग की महिला के लिए आरक्षित हो गया था और तब मुकेश अग्रवाल ने अपनी करीबी मीरा अग्रवाल को इस पद पर निर्वाचित कराया था।
इस बार पद अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित है और ऐसे में अग्रवाल परिवार का सीधा कब्जा इस बार जिला पंचायत पर नहीं हो पाएगा।
भाजपा जिलाध्यक्ष सौरभ मिश्रा ने बताया कि जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए दो आवेदन मिले हैं। प्रत्याशी चयन पर अंतिम फैसला प्रदेश नेतृत्व करेगा। जिसको भी पार्टी प्रत्याशी घोषित किया जाएगा उसे सभी विधायक सांसद और कार्यकर्ता मिलकर पूरे मनोयोग से चुनाव लड़ाएंगे।
सपा जिलाध्यक्ष जितेंद्र वर्मा जीतू ने कहा कि अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने के लिए एक ही आवेदन मिला है। आवेदन को प्रदेश नेतृत्व के पास भेज दिया गया है। प्रदेश नेतृत्व ही पार्टी प्रत्याशी तय कर नाम की घोषणा करेगा। अध्यक्ष पद पर सपा प्रत्याशी ही जीतेगा।
बसपा जिलाध्यक्ष सुरेश चौधरी ने बताया कि जिला पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव लडने के लिए एक आवेदन मिला है। पार्टी का शीर्ष नेतृत्व तय करेगा कि चुनाव में पार्टी उतरेगी या नहीं। पार्टी प्रत्याशी की घोषणा भी शीर्ष नेतृत्व से ही होगी।