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दस दिन में करनी थी जांच, पांच माह में भी नहीं कर पाए

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हरदोई। प्रशासक कार्यकाल के दौरान 25 लाख रुपये से अधिक खर्च करने वाली ग्राम पंचायतों की जांच पांच माह में भी पूरी नहीं हो पाई है। डीएम ने जिले की नौ ग्राम पंचायतों की जांच के लिए 18 अधिकारियों की टीम गठित की थी, लेकिन चार की ही जांच रिपोर्ट आई, लेकिन अधूरी रिपोर्ट होने के कारण इसे वापस भेज दिया गया। खास बात तो यह है कि जांच दस दिन में ही पूरी करनी थी।
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कोरोना संक्रमण के चलते पंचायत चुनाव निर्धारित समय पर नहीं हो पाए थे। ग्राम पंचायतों का कार्यकाल जनपद में 24 दिसंबर 2020 को खत्म हो गया था, लेकिन चुनाव अप्रैल और मई में हुए। इस अवधि में ग्राम पंचायतों का कार्य सुचारु रूप से संचालित करने के लिए प्रशासकों की तैनाती की गई थी। ग्राम सचिव और प्रशासक के संयुक्त हस्ताक्षरों से भुगतान भी किए जा रहे थे। नए प्रधानों के शपथ ग्रहण के बाद पूरे प्रदेश में प्रशासक कार्यकाल में बड़े पैमाने पर बजट खर्च किए जाने की जानकारी मिलने पर शासन ने ऐसी ग्राम पंचायतों के कार्यों की विस्तृत जांच के आदेश दिए थे, जहां 25 लाख रुपये से अधिक का भुगतान प्रशासक कार्यकाल में हुआ है। दो जुलाई 2021 के शासन के निर्देशों के क्रम में डीएम अविनाश कुमार ने भी ऐसी ग्राम पंचायतों की जनपद में जांच के लिए कमेटी गठित की थी। जिले की नौ ग्राम पंचायतें ऐसी थीं, जहां 25 लाख रुपये से अधिक का भुगतान किया गया था। यूं तो दस दिन के अंदर जांच कर आख्या देनी थी, लेकिन नौ में से पांच ग्राम पंचायतों के लिए तैनात किए गए अधिकारियों ने तो जांच रिपोर्ट ही नहीं दी। चार ग्राम पंचायतों की जांच रिपोर्ट आई, लेकिन इनमें जांच में शामिल कई बिंदुओं का उल्लेख ही नहीं था। इस पर यह रिपोर्ट भी संबंधित अधिकारियों को वापस भेज दी गई और उल्लेखित बिंदुओं पर रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है।
इन ग्राम पंचायतों की होनी थी जांच
अहिरोरी विकास खंड की ग्राम पंचायत नीर, सुरसा विकास खंड की ग्राम पंचायत हरदोई देहात, कोथावां विकास खंड की ग्राम पंचायत कल्यानमल, टड़ियावां विकास खंड की ग्राम पंचायत नानकगंज ग्रंट और बहर, टोडरपुर की टुमुर्की, पिहानी की करीमनगर, संडीला की छनोइया और बिलग्राम की परचल रसूलपुर।
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इनकी आई अधूरी जांच
हरदोई देहात, टुमुर्की परचल रसूलपुर और करीमनगर की आख्या संबंधित टीम ने भेजी, लेकिन यह आख्या अधूरी थी। जिन बिंदुओं पर जांच की जानी थी, उनमें से कई बिंदुओं को शामिल ही नहीं किया गया। इस पर दोबारा जांच कर आख्या देने के लिए कहा गया है।
जिम्मेदार बोले
डीपीआरओ गिरीश चंद्र ने बताया कि जांच टीम में शामिल सभी अधिकारियों को जल्द से जल्द जांच रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है। अब तक चार अधिकारियों ने रिपोर्ट दी थी, लेकिन यह अधूरी थी। फाइल वापस भेजकर दोबारा रिपोर्ट देने को कहा गया है। जांच रिपोर्ट आते ही सीडीओ के माध्यम से डीएम को भेज दी जाएगी।
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