फोटो-18- कथा सुनाते कथा व्यास अविचल महाराज। संवाद
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टोडरपुर। विशिष्टता में शिष्टता, महानता में सहजता, उच्चता में उदारता, विषमता में समता, व्यवहार में मृदुलता व प्रतिकूलताओं में धैर्य, यही तो कृष्ण होने की संपूर्ण परिभाषा है। यह बात कथा व्यास अविचल महाराज ने सोमवार को ग्राम औड़ेरी में जन्माष्टमी पर आयोजित कार्यक्रम में कही।
उन्होंने कहा कि जीवन की संपूर्णता का नाम ही तो कृष्ण है। जीवन की ऐसी कोई संभावना नहीं जो कृष्ण में आकर पूर्ण न हुई हो। युद्ध के मैदान में शस्त्रकार, कुरुक्षेत्र के मैदान में शास्त्रकार और असंख्य गोपियों के मध्य में नृत्यकार की भूमिका निभाना उनके बहु आयामी व्यक्तित्व को ही दर्शाता है।
कहा कि कृष्ण अर्थात एक ऐसा जीवन जहां न पाने का निषेध है, न खोने का भय। जहां न राजसी सुखों का परित्याग है, न विलासिता की इच्छा। जहां न किसी से द्वेष है न अपनों का मोह। कृष्ण न बन सको, कोई बात नहीं, कृष्ण के बन जाओ यही सच्चा कृष्ण जन्मोत्सव होगा। इस मौके पर राम शंकर, ऋषिकांत, संयोग मिश्र व उपदेश सिंह आदि मौजूद रहे।