हरदोई। सियासत में हरदोई के चाणक्य कहे जाने वाले भाजपा नेता नरेश अग्रवाल ने जिले की सियासत में बड़ा उलट फेर करा दिया है। एमएलसी चुनाव में सपा प्रत्याशी रजीउद्दीन ने अचानक पर्चा वापस लेकर अपनी पार्टी को बड़ा झटका दिया है। सपा खेमे में उनके इस कार्य को धोखा बताया जा रहा है तो भाजपा में उनके इस योगदान को राष्ट्रहित में किया गया निर्णय बताया जा रहा है।
इन सबसे इतर सच तो यह है कि इस सीट से सपा के सिटिंग एमएलसी मिस्वाहुउद्दीन और नरेश अग्रवाल से दोस्ती न केवल बगावत की वजह बनी है, बल्कि ऐन वक्त उनके बेटे सपा प्रत्याशी ने बिना लड़े ही यह सीट भाजपा की झोली में डाल दी है।
एमएलसी स्थानीय निकाय चुनाव के लिए जारी हुई अधिसूचना के बाद जिले में हलचल शुरू हो गई थी। विधानसभा चुनाव के बीच ही इस अधिसूचना ने टिकट के दावेदारों से लेकर चुनाव को लेकर अटकलें लगानी शुरू कर दी थी।
6 फरवरी के अंक में अमर उजाला ने सपा के सिटिंग एमएलसी मिस्वाहुउद्दीन और नरेश अग्रवाल की दोस्ती एवं सियासी दुश्मनी की खबर प्रकाशित की थी। तब जो कयास लगाये जा रहे थे वो बुधवार को सही साबित हुए।
दो दिन पूर्व भी अमर उजाला ने इस अटकल को लेकर खबर प्रकाशित की थी। यह सभी अटकलें सही साबित हुई हैं। आखिरकार वर्षों पुरानी दोस्ती के रंग सियासत के संग दिखाई दिए हैं।
ऐसा माना जा रहा है कि एमएलसी मिस्वाहुउद्दीन जल्द ही भाजपा में शामिल हो सकते हैं। भाजपा नेता पूर्व राज्यसभा सांसद नरेश अग्रवाल ने कहा कि वे अपने दोस्त एमएलसी मिस्वाहुउद्दीन को भाजपा में आने का न्योता दे रहे हैं।
उनको भाजपा में आकर राष्टहित की राजनीति में अपना योगदान करना चाहिए। उन्होंने पर्चा वापस लेने वाले सपा प्रत्याशी पूर्व जिला पंचायत सदस्य रजीउ्द्दीन को भी भाजपा में शामिल होने का न्योता दिया। इससे साफ तौर पर लग रहा है कि दोस्ती के रंग फिर से सियासत के संग होंगे।