हरदोई। 108 और 102 एंबुलेंस सेवा के ईएमटी व पायलटों की हड़ताल की वजह से गंभीर रोगियों की जान खतरे में पड़ गई। उनके तीमारदारों को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। हालत यह रही कि एंबुलेंस सेवाओं के लिए जारी टोल फ्री नंबर भी रिसीव नहीं हुए। कर्मचारी आठ घंटे से अधिक की ड्यूटी पर ओवर टाइम का भुगतान करने की मांग कर रहे हैं।
रविवार आधी रात से हड़ताल कर रहे एंबुलेंस कर्मियों से बातचीत शासन स्तर पर की जा रही है, लेकिन कोई हल नहीं निकल रहा है। एएलएस संघ के जिलाध्यक्ष सलिल अवस्थी का कहना है कि सोमवार बताया गया था कि पुराने कर्मचारियों को नहीं हटाया जाएगा, लेकिन मंगलवार की सुबह इस बात से जिम्मेदारों ने इनकार कर दिया।
दरअसल, एंबुलेंस संचालन का ठेका दूसरी कंपनी को दे दिया गया है। नई कंपनी पुराने कर्मचारियों को हटा रही है। यह मामला सुलझ रहा था, लेकिन तब तक कर्मचारियों की ओर से एक और मांग जोर पकड़ गई। कर्मचारियों का कहना है कि वह लोग आठ घंटे की ड्यूटी के लिए 12 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय पाते हैं, लेकिन ड्यूटी हर रोज आठ की जगह 12 घंटे कराई जा रही है। ऐसे में ओवर टाइम की मांग भी की गई है। मंगलवार को भी शाहजहांपुर रोड पर चौपाल सागर के पास एक मैदान में एंबुलेंस खड़ी रहीं और कर्मचारी एकत्र रहे। कर्मचारियों ने पुरानी कंपनी की जगह बनाई गई नई कंपनी का पुतला बनाकर भी फूंका।
प्रकरण 1- सवायजपुर निवासी लक्ष्मी देवी को प्रसव के लिए जिला महिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था। प्रसव होने के बाद उन्हें वापस सवायजपुर घर जाना था। 108-102 एंबुलेंस सेवा की हड़ताल होने पर परिजनों ने एक वैन आठ सौ रुपये किराए पर करनी पड़ी।
प्रकरण 2- मानपुर निवासी पूजा को भी प्रसव पीड़ा पर जिला महिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था। प्रसव होने और स्वास्थ्य में सुधार होने पर उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। परिजनों को एंबुलेंस सेवा की हड़ताल होने की बात पता चली, तो एक ऑटो तीन सौ रुपये में किराए पर किया और गांव गईं।
पांच एंबुलेंस चलवाई गईं
एएलएस संघ के अध्यक्ष सलिल अवस्थी ने बताया कि आकस्मिक जरूरतों पर मरीजों को दिक्कत न हो इसलिए पांच एंबुलेंस चलवा दी गई हैं। टोल फ्री नंबर से सूचना मिलने पर कुछ गंभीर मरीजों को एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया। उन्होंने कहा कि मरीजों या आम जनता को परेशान करना उद्देश्य नहीं है, लेकिन कर्मचारियों के साथ भी भेदभाव नहीं होना चाहिए।