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न कार्य योजना बनी और न ली मंजूरी, 98 लाख का भुगतान

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हरदोई। ग्राम्य विकास राज्य मंत्री के मनरेगा में भ्रष्टाचार की कोई गुुंजाइश न होने के दावे के उलट जिले में मनरेगा में खेल हो गया। न तो कार्ययोजना बनाई गई और न ही जिम्मेदारों के पास पत्रावली भेजी गई। कछौना क्षेत्र पंचायत ने मनरेगा के तहत जिम्मेदारों की स्वीकृति के बिना ही लगभग 98 लाख रुपये के कार्य करा दिए।
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मनरेगा के तहत क्षेत्र पंचायत से कराए जाने वाले कार्याें की अनुमति मनरेगा के जिला कार्यक्रम समन्वयक से लेना आवश्यक है। जिलाधिकारी मनरेगा के जिला कार्यक्रम समन्वयक होते हैं, जबकि सीडीओ अपर जिला कार्यक्रम समन्वयक की जिम्मेदारी संभालते हैं। क्षेत्र पंचायत से कराए जाने वाले कार्यों के लिए बाकायदा पत्रावली तैयार की जाती है। क्षेत्र पंचायत की बैठक में कार्ययोजना को मंजूरी दी जाती है। इसके बाद इसे संस्तुति के लिए मनरेगा के जिला स्तरीय अधिकारियों के पास भेजा जाता है। लेकिन नियम विपरीत कछौना में मनरेगा से क्षेत्र पंचायत में वर्ष 2019-20 में 90 लाख 94 हजार रुपये के कार्य कराए गए, जबकि चालू वित्तीय वर्ष में भी 7 लाख 46 हजार रुपये के कार्य कराए गए हैं।
कार्यदायी संस्था भी नहीं की नामित
कछौना क्षेत्र पंचायत ने मनरेगा से कार्य कराने के लिए जब कार्ययोजना ही नहीं बनाई तो कार्यदायी संस्था भी नामित नहीं की। अब कार्यदायी संस्था नामित किए बिना कार्य कराना संभव नहीं। ऐसे में अब पूरे मामले को लेकर मनरेगा के जिम्मेदारों को भी बड़े खेल की आशंका सता रही है।
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! समीक्षा के बाद भी गड़बड़ी
आम तौर पर हर शुक्रवार को मुख्य विकास अधिकारी मनरेगा सहित अन्य कार्यों की समीक्षा जिला मुख्यालय पर करतीं हैं। व्हाट्स एप पर मनरेगा कार्यों की समीक्षा हर रोज होती है। शुक्रवार को बाकायदा जिला मुख्यालय पर विकास भवन सभागार में बैठक होती है और समीक्षा की जाती है। लेकिन फिर भी इतने बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हो गई।
ब्लाक के जिम्मेदारों में मची अफरा तफरी
बिना कार्ययोजना और अनुमति के ही मनरेगा के तहत क्षेत्र पंचायत से कार्य कराने के मामले के सतह पर आ जाने से ब्लाक के जिम्मेदारों में खलबली मची है। वित्तीय वर्ष 2019-20 और चालू वित्तीय वर्ष में यहां तैनात तकनीकी सहायक, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अवर अभियंता, कार्य प्रमुख आदि अपने बचाव की जुगत में लगे हैं। मामले को दबाने की कवायद शुक्रवार शाम से ही तेज हो गई।
आनन-फानन ही हुए जांच के आदेश
आनन-फानन ही मनरेगा उपायुक्त प्रमोद सिंह चंद्रौल ने पूरे प्रकरण की जांच कराने के आदेश जारी कर दिए हैं। ग्राम्य विकास अभिकरण के सहायक अभियंता आरके सिंह को जांच अधिकारी बनाया गया है। एक सप्ताह के अंदर जांच आख्या देने को कहा गया है। कराए गए कार्यों का स्थलीय सत्यापन भी करने को कहा गया है।
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