हरदोई। पति के साथ अपनी तस्वीर निहारती रचना और साथ में बच्चे। संवाद
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कछौना। ओमान कमाने गए इंटीरियर डेकोरेटर को जान के लाले पड़ गए। ओमान जाकर युवक बीमार पड़ गया, लेकिन पासपोर्ट नियोक्ता कंपनी की कस्टडी में होने से वह देश नहीं लौट पा रहा है। पत्नी ने प्रदेश और केंद्र सरकार से मदद की गुहार लगाई है। डीएम के माध्यम से प्रकरण की जानकारी दिल्ली स्थित ओमान के दूतावास को दी गई है।
कछौना के पुरानी बाजार निवासी चंद्रशेखर सोनी (42) इंटीरियर डेकोरेटर है। पत्नी रचना सोनी ने बताया कि करीब दस वर्ष से चंद्रशेखर अलग अलग स्थानों पर नौकरी करता रहा है। पहले ओमान फिर मसकट और फिर दुबई में नौकरी कर चुका है। लगभग छह माह पहले वह फिर से ओमान गया था। पत्नी का कहना है कि दो माह पहले पति ने फोन पर बीमारी की जानकारी दी और कंपनी की ओर से चिकित्सा सुविधाएं न मिलने की बात कही।
इलाज के लिए उसने बीस हजार रुपये खाते में भेजने की बात कही। लगभग एक माह पहले फिर से चंद्रशेखर ने पत्नी को फोन कर बताया कि तबीयत ज्यादा खराब है और वह घर लौटना चाहता है, लेकिन कंपनी का मालिक उसका वीजा का रुपया बाकी होने के कारण पासपोर्ट नहीं दे रहा है।
पत्नी कहना है कि कंपनी उससे मजदूरी भी करा रही है और इलाज भी नहीं करा रही। महिला और उसके दो बच्चों आरोही और अंश बेहाल हैं। मामला संज्ञान में आने पर कछौना कोतवाली पुलिस महिला के पास पहुंची। एसपी अजय कुमार ने बताया कि चंद्रशेखर की देश वापसी के लिए डीएम के माध्यम से ओमान दूतावास को लिखा गया है। अन्य आवश्यक कार्यवाही भी की जा रही है। उधर, सोशल मीडिया पर भी चंद्रशेखर को वापस लाने की मुहिम चल निकली है। कई लोगों ने फेसबुक और ट्वीटर के जरिए रचना सोनी की बात विदेश मंत्रालय और दूतावास तक पहुंचाने की कोशिश की है।
चंद्रशेखर के पास ओमान में रहने के लिए दो वर्ष का वीजा है। उसका पासपोर्ट अपडेट है। परिजनों का कहना है कि सारे अभिलेख पूर्ण हैं, लेकिन पासपोर्ट कंपनी मालिक ने अपने पास रख लिया। इसलिए समस्या हो रही है। चंद्रशेखर के कुछ परिजन नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं कि राजस्थान के एक युवक की मदद से वह विदेश गया था। कंपनी ने इंटीरियर डेकोरेटर का काम देने के लिए उसे बुलाया गया था, लेकिन मजदूरी कराई जा रही है।