खुरपका व मुंहपका एक संक्रामक रोग है, जो रोग ग्रस्त
पशुओं से स्वस्थ पशुओं में केवल संपर्क से ही नहीं वरन चारा, दाना व पानी
से फैलता है। इसमें मृत्यु की संभावना तो बहुत कम होती है, परंतु मादा
पशुओं का दुग्ध उत्पादन, उनकी गर्भधारण क्षमता और बैलों या भैसों के कार्य
करने की क्षमता पर भी प्रभाव पड़ता है।
मौसम के बदलाव के बाद दुधारू
पशुओं में खुरपका व मुंहपका जैसे संक्रामक रोगों के बढ़ने की प्रबल संभावना
रहने के कारण पशुपालकों को चेताते हुए मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. राजेश
मोहन दीक्षित ने यह बात बताई। उन्होंने पशुपालकों को चेताते हुए बताया कि
इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि पशुओं को जब कभी भी तेज बुखार आए, पशु
बेचैन सा रहे, खाना पीना बंद कर दे और उसका दूध भी घट जाए।
यही नहीं
मसूढ़े, जीभ और खुरों में छाले निकल आते हैं, जिनके फूटने पर घाव बन जाते
हैं, ऐसे लक्षण खुरपका व मुंहपका के ही होते हैं। कहा कि मुंह और पैर में
छाले से मुंह से ज्यादा झागदार लार निकलती है और पशु लंगड़ाने लगता है।
इसकी रोकथामों के लिए पशुओं को नियमित रूप से टीके लगवाने चाहिए।
संक्रामक
गर्भपात पशुओं का संक्रामक रोग है, जिसमें गाय भैसों में गर्भपात और
बांझपन की संभावना होती है। रोग से बचाव को चार से आठ माह की बछियों को
टीका लगवाना चाहिए। गिरे हुए भ्रूण, जेर तथा संपर्क में आई सभी वस्तुओं को
जलाकर या गड्ढे में दबाकर उसके ऊपर चूना डाल देना चाहिए।
मुख्य पशु
चिकित्साधिकारी ने बताया कि जिले में खुरपका व मुंहपका का प्रकोप न फैलने
पाए, इसको लेकर टीकाकरण कराया जा रहा है। टीकाकरण को लेकर
चिकित्साधिकारियों को वैक्सीन मुहैया कराने सहित जरूरी निर्देश भी दे दिए
गए हैं। पशुपालकों को चाहिए कि वह पशु अस्पतालों से संपर्क कर टीकाकरण
अवश्य करा लें। ताकि अपने अपने पशुओं को सुरक्षित रख सके।