राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन में ग्रामीण महिलाओं
को आर्थिक रूप से मजबूत करने को स्वयं सहायता समूह गठित कराए जा रहे हैं।
विकास खंडों में समूहों के गठन को लक्ष्य निर्धारित किया गया और एक ब्लाक
को इंटेंसिव का दर्जा देकर सबसे ज्यादा समूह गठित करने के निर्देश दिए गए,
पर इंटेंसिव ब्लाक में ही समूह गठन को लेकर लापरवाही की जा रही है।
अब
सीडीओ ने नाराजगी जताई है। महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने को केंद्र
सरकार ने मिशन को शुरू किया। मिशन के अंतर्गत महिलाओं के समूह गठित कर
उनको कुटीर उद्योगों को करने को प्रेरित किया जाएगा और उद्योग करने को लोन
भी दिलाया जाएगा। योजना की गाइड लाइन के अनुसार हर जिले में एक इंटेंसिव
ब्लाक भी चयनित किया गया है। जिसमें मिशन का प्राथमिकता से संचालन कराने के
निर्देश हैं।
जिले के 19 विकास खंडों में से अहिरोरी को इंटेंसिव ब्लाक
चयनित किया गया, जिसमें सामान्य विकास खंडों से अधिक समूहों के गठन का
लक्ष्य निर्धारित है। शासन ने जिले में 900 स्वयं सहायता समूह का गठन को
कहा, जिसमें इंटेंसिव ब्लाक अहिरोरी को 270 समूह गठित करने हैं।
इसके
अलावा अन्य विकास खंडों में 35-35 समूह गठित करने का लक्ष्य है। शासन ने तो
स्वयं सहायता समूह गठित करने तथा बैंक से लोन कराने के निर्देश दे दिए, पर
जिले में समूह गठन की प्रक्रिया तेजी नहीं पकड़ पा रही। इंटेंसिव ब्लाक
अहिरोरी में ही समूह गठन की स्थिति सबसे अधिक खराब है।
अहिरोरी में 270
समूह गठन के लक्ष्य के सापेक्ष सिर्फ 77 समूह गठित किए गए, जबकि अन्य विकास
खंडों में 630 समूहों के सापेक्ष 492 समूह गठित किए जा चुके हैं। इंटेंसिव
ब्लाक में समूह गठन की प्रगति दुरुस्त न होने पर सीडीओ आरएनएस यादव ने
नाराजगी जताई है। उधर, इंटेंसिव ब्लाक अहिरोरी में ही समूह गठन को लेकर
बरती जा रही लापरवाही पर सीडीओ ने अब कार्रवाई का भी मन बना लिया है।
विकास
खंड अहिरोरी के बीडीओ/उपायुक्त राजकरण पाल से समूह गठन का पूरा ब्योरा
मांगा गया है, जबकि इसके पहले भी कई बार निर्देश दिए जा चुके हैं, लेकिन
प्रगति नहीं सुधरी। ऐसे में संभावना जताई जा रही कि समूह गठन में लापरवाही
की गाज बीडीओ पर गिर सकती है।