हरपालपुर। गंगा, रामगंगा और गर्रा में आई बाढ़ भले ही उतरने लगी हो, लेकिन बाढ़ पीड़ित इलाकों के बाशिंदों की मुसीबतें बढ़ती जा रही हैं। हरपालपुर विकास खंड के पलिया विद्युत उपकेंद्र से लगभग 150 गांवों की बिजली आपूर्ति सुरक्षा की दृष्टि से बंद कर दी गई है। गांवों में घुसा बाढ़ का पानी उतरने के बाद ही आपूर्ति दोबारा शुरू होने की उम्मीद है। प्रशासन बाढ़ पीड़ितों को खाद्य सामग्री से लेकर अन्य सहायता उपलब्ध कराने की कवायद में लगा है। मवेशियों के लिए भूसे की व्यवस्था भी प्रशासन ने करा दी है।
कटरी के इलाके में गंगा, रामगंगा और गर्रा सबसे महत्वपूर्ण नदियां हैं। इन नदियों के किनारे जनपद के लगभग 200 से अधिक गांव बसे हैं। बीते दिनों पहाड़ों पर हुई बारिश के कारण बांधों से पानी छोड़े जाने का असर यहां भी दिखा। गंगा, रामगंगा और गर्रा का जलस्तर तेजी से बढ़ा तो सवायजपुर और बिलग्राम तहसील क्षेत्र के गांव बड़ी संख्या में प्रभावित हुए। कई मार्ग कट गए। गांवों में पानी भर जाने के कारण बाशिंदों को सड़क किनारे डेरा डालना पड़ रहा है, तो कुछ ने चारपाई पर गृहस्थी बसा ली है। गांवों में भरा पानी निकलने में अभी काफी वक्त लगेगा। पलिया विद्युत उपकेंद्र के सबस्टेशन ऑफीसर अतुल वाजपेयी ने बताया कि बाढ़ प्रभावित 150 गांवों और उनके मजरों की बिजली आपूर्ति सतर्कता बरतते हुए बंद कर दी गई है।
जिलाधिकारी अविनाश कुमार ने अतिरिक्त मजिस्ट्रेट कपिल देव सिंह को बाढ़ पीड़ितों तक लंच पैैकेट वितरित करने की व्यवस्था सौंपी है। बुधवार का मुरबा शाहबुद्दीनपुर के परिषदीय विद्यालय में प्रशासन की राहत रसोई चली, यहां से 1500 लंच पैकेट बाढ़ पीड़ित इलाकों में राजस्व टीमों ने बांटे। इसके अलावा मिशन आत्म संतुष्टि के संरक्षक राजवर्धन सिंह ने बुधवार को बाढ़ प्रभावित गांवों में लंच पैकेट वितरित कराए। आलमपुर गांव में बाढ़ पीड़ितों के लिए लगातार रसोई संचालित होगी और मरीजों के लिए एक एंबुलेंस भी मौजूद रहेगी।
कटान का डर सता रहा
बिलग्राम तहसील क्षेत्र के माधौगंज विकास खंड के कई गांव में भी बाढ़ का असर दिख रहा है। गौरा, बघियारी, कल्हामऊ, विहार, फत्तेपुर चौगवां आदि के किसानों की धान, सरसों और आलू की फसल बाढ़ के पानी में डूब गई है। सवायजपुर तहसील क्षेत्र के ग्राम बरहुली में रामगंगा का जलस्तर घटने के बाद भी कटान की आशंका से ग्रामीण भयभीत हैं। नदी किनारे बसे सुरेश, पृथ्वीराम, रामकिशन, छोटे,रामरतन, गंगाराम, मलखान, केशवराम, महावीर आदि ने कहा कि नदी का पानी घटने के साथ ही कटान भी तेज हो जाती है।
बाढ़ कंट्रोल रूम बना, चौकियों पर अफसरों की तैनाती
अपर जिलाधिकारी वंदना त्रिवेदी ने बताया कि बाढ़ के हालत से निपटने के लिए गांधी भवन में बाढ़ नियंत्रण कक्ष बनाया गया है। टेलीफोन नंबर - 05852-234385 है। कंट्रोल रूम में आठ-आठ घंटे की तीन शिफ्ट में कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। एडीएम ने बताया कि बाढ़ चौकियों पर नियंत्रण और निगरानी रखने के लिए राजस्व और पुलिस के अधिकारियों की ड्यूटी भी तीन शिफ्टों में लगाई गई हैं।
नदियों का जलस्तर कम हुआ
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता अखिलेश गौतम ने बताया कि रामगंगा नदी के जलस्तर में तीस सेंटीमीटर की कमी आई है, लेकिन यह अब भी खतरे के निशान यानी 137.10 मीटर पर बह रही है। गंगा का जलस्तर राजघाट के गेज के आधार पर दस सेंटीमीटर कम आंका गया है। यह अब 125.59 मीटर पर बह रही है। इसी तरह गर्रा का जलस्तर भी 40 सेंटीमीटर कम हुआ है और यह 129.55 मीटर पर बह रही है। 48 घंटे के अंदर जलस्तर काफी कम हो जाएगा।
1233 हेक्टेयर फसलें बाढ़ में डूबी
जनपद के बाढग़्रस्त इलाकों में फसलों के नुकसान का आकलन बुधवार देर शाम पूरा कर लिया गया। डीएम अविनाश कुमार ने बताया कि जनपद के सभी बाढग़्रस्त इलाकों में राजस्व विभाग के कर्मचारियों से सर्वे कराया है। कुल 1233.7 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फसलों का नुकसान हुआ है। इसको लेकर विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेजी जा रही है। नियमानुसार मुआवजा दिए जाने की प्रक्रिया भी शुरू कराई गई है। इसके अलावा 32वीं वाहिनी पीएसी की आपदा राहत प्लाटून भी बुला ली गई है। इसकी दो टीमें सवायजपुर तहसील में और एक टीम बिलग्राम तहसील क्षेत्र में लगाई गई है।
एक नजर प्रशासन के इंतजाम पर
- बाढ़ ग्रस्त इलाकों में 18 बाढ़ चौकियां सक्रिय
- 18 बाढ़ चौकियों पर 77 स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती
- आवागमन के लिए 21 नावों/स्टीमरों का इंतजाम
- 15 चिकित्सीय दल
- नौ सचल दल सक्रिय
- 300 क्विंटल भूसे का वितरण