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पांच लाख जाबकार्ड धारक, 100 दिन का रोजगार कुछ लोगों को

Sun, 17 Jan 2016 12:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो हरदोई।
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जिले में मनरेगा और उससे होने वाले कार्यों के मामले में जनपद की स्थिति भले ही बेहतर रही हो लेकिन अब जाबकार्ड धारकों का काम से मोह भंग हो रहा है। जिले में पांच लाख से अधिक जाबकार्ड धारक हैं पर दो लाख मजदूर भी नियमित रूप से काम नहीं कर रहे हैं। 100 दिन का काम पाने वाले महज कुछ सैकड़ा ही जाबकार्ड धारक हैं। जबकि मनरेगा मजदूरों को रोजगार के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए काफी प्रयास किए गए, लेकिन स्थिति दयनीय ही बनी हुई है। मजदूरों का काम से मोहभंग अब अधिकारियों के समझ से भी परे है।
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192262 ही जाबकार्ड धारक सक्रिय
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना से जिले में 505518 लोगों के जाबकार्ड बनाए गए हैं। जिसमें से अनुसूचित जाति के 203252 जाबकार्ड, एसटी वर्र्ग के 503 और अन्य वर्ग के 301763 जाबकार्ड बने हैं। जिसमें से कुल 192262 जाबकार्ड धारक ही सक्रिय हैं।

116805 लोगों को वित्तीय वर्ष में मिला काम
मनरेगा में जनपद के जाबकार्ड धारकों को काम भी नहीं मिल रहा। जिले में भले ही 192626 लोगों नियमित रूप से काम करते हों लेकिन उनमें से वित्तीय वर्ष 2015-16 के अंतर्गत अभी तक सिर्फ 116805 लोगों ने ही काम किया है। जिनमें से 21776 महिलाओं को काम दिया गया। जबकि अनुसूचित जाति के 39032, एसटी के 109 और अन्य वर्ग से 55888 लोगाें को काम दिया गया।
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1339 को किया 100 दिन का काम
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना के निर्देशों के अनुसार लोगों को 100 दिन का काम दिया जाना चाहिए। लोगों की अरुचि के चलते जिले में वित्तीय वर्ष के दौरान सिर्फ 1339 लोगों ने 100 दिन का रोजगार पाया है। जिसमें अनुसूचित जाति वर्ग के 540, एसटी वर्ग से तीन और अन्य वर्ग के 796 लोग हैं।

विकास खंडों में इस तरह दिया 100 दिन का रोजगार
विकास खंड स्तर से जाबकार्ड धारकों को 100 दिन का काम देने में रुचि नहीं दिखाई गई। जिले के विकास खंड में अहिरोरी में 34, बावन में 54, बेहंदर में 47, भरावन में 41, भरखनी में 310, बिलग्राम में 11, हरियावां में 74, हरपालपुर में 70, कछौना में 06, कोथावां में 22, माधौगंज में 03, मल्लावां में 02, पिहानी में 68, सांडी में 51, संडीला में 11, शाहाबाद में 225, सुरसा में 169, टड़ियावां में 50 और टोडरपुर में 91 जाबकार्ड धारकों ने 100 दिन का रोजगार किया है।

लंबित एफटीओ से भुगतान में होता विलंब
मनरेगा जाबकार्ड धारकों की अरुचि के पीछे लंबित भुगतान की स्थिति को भी बड़ा कारण मना जा रहा है। एमआईएस की मानीटरिंग में एफटीओ को लंबित बताया जा रहा है। इनमें 13902 की मस्टर रोलों की उपस्थिति, 2446 कार्यों की एमबी मैनेजमेंट, 1973 के भुगतान पर प्रथम हस्ताक्षरकर्ता पर सात दिनों से और 429 के भुगतान द्वितीय हस्ताक्षरकर्ता पर आठ दिनों से लंबित हैं।

मुख्य विकास अधिकारी,विजय कुमार गुप्ता ने बाताया कि मनरेगा से काम करने के लिए लोगों को काफी प्रेरित किया गया है लेकिन कोई जाबकार्ड धारक ही काम नहीं कर रहे हैं, हालांकि 100 दिन का रोजगार करने वाले लोगाें की संख्या बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।!
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