एक तरफ जिले में पात्र जरूरतमंदों को शासन की योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा तो दूसरी तरफ इन्हीं योजनाओं का दुरुपयोग कर अपात्र कई वर्षाें से लाभ उठाकर सरकारी व्यवस्थाआें को ठेंगा दिखा रहे हैं। ऐसा ही मामला बावन ब्लाक के ग्राम बाजपुर नकटौरा का सामने आया है जिसमें 22 सुहागिनें विधवा बनकर पेंशन का लाभ पिछले पांच वर्ष से ले रही हैं। शिकायत में प्रधान व रोजगार सेवक पर मिलीभगत का आरोप लगाया गया है। इस संबंध में जिला प्रोबेशन अधिकारी जयदीप सिंह ने बताया कि शिकायत मिली है। इसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। जांच में गड़बड़ी मिलने पर रिकवरी भी कराई जा सकती है।
सवायजपुर तहसील के ग्राम बाजपुर नकटौरा में 22 अपात्रों को विधवा पेंशन का लाभ दिए जाने की शिकायत प्रोबेशन विभाग से हुई है। गांव के कुछ लोगों ने इसकी शिकायत जिलाधिकारी रमेश मिश्र को शिकायती पत्र के माध्यम से की है जिसमें बताया गया कि पिछले पांच वर्ष से लगातार गांव की 22 महिलाएं को जो सुहागिनें हैं उनको विधवा पेंशन का लाभ दिलाया जा रहा है। इसके पीछे प्रधान व एक रोजगार सेवक को दोषी बताया गया है। जिलाधिकारी ने भी माना कि दोषी कौन है यह बाद का विषय है लेकिन पहले जांच का बिंदु यह है कि जो शिकायत हुई है वह सही है या नहीं। शिकायत की पुष्टि होने के बाद कार्रवाई की जाएगी। शिकायतकर्ता ने अपना नाम जिलाधिकारी को नन्हे पुत्र सुबेदार बताया है। जिलाधिकारी ने इस प्रकरण पर जांच कराए जाने की बात कही है
इन अपात्रों से खड़बड़ाया विभाग
एक ही गांव बाजपुर नकटौरा में जिन 22 महिलाओं पर विधवा पेंशन लिए जाने का आरोप लगाया है उनमें बिजली पत्नी जुगराज, छोटी पत्नी छोटकोउनू, जयदेवी पत्नी प्रकाश, मीना पत्नी नन्हकू, मीरा देवी पत्नी विश्राम, मुन्नी पत्नी सीताराम, नन्हीं पत्नी देशराज, नूरजहां पत्नी जलालुद्दीन, रामप्यारी पत्नी बड़कोनू, रामप्यारी पत्नी मुन्नू, रामकली पत्नी टिकई, रामलली पत्नी भगवन्नू, रामसती पत्नी छोटेलाल, रामवती पत्न अनंगपाल सिंह, रामवती पत्नी छोटेलाल, रामवती पत्नी कटे, रानी पत्नी ब्रम्हा, रन्नो पत्नी नन्हे, सावित्री पत्नी रामशंकर , सुशीला पत्नी सुरेश, शांती देवी पत्नी मुनेश्वर सिंह, उमा पत्नी झिगुरी शामिल हैं।
ब्लाक से आने वाले आवेदन ही करते हैं स्वीकार- प्रोबेशन अधिकारी
जिला प्रोबेशन अधिकारी जयदीप सिंह ने बताया कि जब से वह तैनात हुए हैं। उन्होंने जितने भी नए आवेदन स्वीकार किए हैं। वह विकास खंड से जांच के बाद ही स्वीकार किए हैं। इसलिए खामियां होने का सवाल ही नहीं है। शेष पुराने समय में गड़बड़ियां रही होंगी उसी समय यह आवेदन स्वीकार हो गए होंगे।
हर साल होता सत्यापन तो पकड़ा क्यों नहीं गया
देखने वाली बात यह है कि जब हर साल विभाग सत्यापन कराता है तो ऐसे मामले पकड़ में क्यों नहीं गए। यदि सत्यापन विभागीय अधिकारी व कर्मी भली भांति सत्यापन करते तो निश्चित रूप से इस गांव के 22 सहित अन्य गांवों में भी ऐसे फर्जी मामले सामने आते लेकिन नहीं आए। इसके पीछे क्या कारण है यह भी विभागीय जांच का विषय है।