हरदोई। पिछले साल आलू की बंपर पैदावार के बीच औने-पौने दामों पर बेचने पर विवश रहे किसानों की इस बार कमाई की उम्मीदों पर मौसम का सितम भारी पड़ गया।
अभी तक जिले में हो चुकी आलू की 35 फीसदी खोदाई में पिछले साल की अपेक्षा आलू की पैदावार 25 फीसदी तक घटती दिख रही है। इससे किसानों के चेहरे उदास हैं।
सबसे ज्यादा नुकसान मटियार और जलभराव वाले खेतों में हुआ है। कृषि वैज्ञानिक भी मानते हैं कि पके आलू की खोदाई के दौरान जिस तरह से इसका साइज छोटा निकल रहा, उससे करीब 25 फीसदी तक पैदावार कम होती दिख रही है।
यदि यही औसत रहा तो इस साल आलू की पैदावार काफी घट जाएगी। पिछले साल जिले में आलू का रकबा करीब 13 हजार हेक्टेयर था। तब औसतन उपज प्रति हेक्टेयर 350 क्विंटल की थी।
इस साल भी रकबा कमोवेश उतना ही है, मगर उपज करीब 265 क्विंटल प्रति हेक्ेटयर के औसत से निकल रही है। यदि यही औसत रहा तो जिले में करीब 25 फीसदी तक आलू की पैदावार कम रह जाएगी।
अभी तक कुल रकबे में करीब 35 फीसदी आलू की खोदाई हुई, जिसमें औसतन 25 फीसदी तक आलू कम निकलने की बात सामने आई है। यह अलग बात है कि अभी 60 फीसदी रकबे के आलू की खोदाई होना शेष है।
यदि यह औसत सुधर भी जाता है, तब भी 10 से 15 फीसदी आलू की पैदावार कम रहने की संभावना है। आलू की कम पैदावार जिले के करीब 41 हजार किसानों को प्रभावित कर रही है।
अभी गर्म है आलू का बाजार
पिछले साल की अपेक्षा इस साल अभी आलू के बाजार में गर्मी है। पिछले वर्ष इस समय आलू का भाव करीब 500 रुपये क्विंटल था तो अबकी 800 रुपये क्विंटल तक है।
अलग-अलग बाजारों में कीमतों में फर्क है। आलू की घटती-बढ़ती आमद के बीच भाव ऊपर नीचे हो रहे हैं।
किसानों का कहना है कि यदि पिछले साल की तरह आलू की पैदावार का औसत रहता और इस वर्ष के बाजार भाव पर आलू बिकता तो पिछले वर्ष की तुलना में प्रति बीघा 500 रुपये तक का मुनाफा बढ़ जाता।
पिछले वर्ष आलू की बंपर पैदावार हुई थी, मगर भाव काफी कम रहने से मुनाफे में तीन से चार हजार प्रति बीघा का नुकसान हुआ था।
दो लाख मीट्रिक टन भंडारण क्षमता
पिछले वर्ष जिले में करीब 34 लाख क्विंटल आलू की पैदावार हुई थी। 50 फीसदी कच्चा आलू तैयार होने के दौरान ही बिक जाता है।
वहीं, 50 फीसदी आलू शीतगृहों में भंडारित होने के साथ बाहर की मंडियों में बिकने के लिए जाता है। जिले में करीब 32 कोल्ड स्टोरेज संचालित हो रहे हैं, जिनकी 20 लाख क्विंटल आलू भंडारण की क्षमता है।
बोले किसान, अबकी मौसम बना बेईमान
शाहाबाद क्षेत्र के किसान दानिश, अतीक, इसरार और इश्तिखार ने बताया कि पिछले साल जिन खेतों में 30 क्विंटल प्रति बीघा के हिसाब से आलू की पैदावार हुई, वहां अबकी 20 क्विंटल के औसत से निकल रहा है।
आलू का साइज काफी कम हो गया और कालापन भी है। बेमौसम बारिश से खेतों में नमी बनी रहने से कच्चा आलू पकने तक पूरा आकार नहीं ले सका और कालापन आया है।
पिछले साल बाजार की मंदी से बंपर पैदावार का फायदा नहीं मिला, इस बार बाजार चढ़ने के बाद भी मुनाफा होता नजर नहीं आ रहा है।
हरपालपुर क्षेत्र के किसान रामचंद्र एवं छोटे ने बताया कि कच्चा आलू खोदने के दौरान खेतों से आलू निकलने का औसत कहीं 50 तो कहीं 65 क्विंटल था, मगर आलू जब पककर तैयार हुआ तो खोदाई के दौरान आलू के निकलने का औसत 45 से 45 क्विंटल है।
पिछले वर्ष की अपेक्षा पैदावार कम हुई है।
आलू की सेहत और रंग पर दिखा असर
कच्चे आलू की खोदाई के दौरान के कई बार हुई हल्की बारिश आलू पर सितम ढाने वाली रही।
जलभराव एवं निचली भूमि वाले क्षेत्रों के अलावा मटियार खेतों में आलू के पककर तैयार होने की अवधि में बिगड़े मौसम ने आलू की सेहत के साथ ही रंग बिगाड़ने का काम किया। इससे आलू का साइज कम होने के साथ ही उसके रंग पर काली चित्ती सी दिखाई दी है।
अफसरों की जुबानी
मौसम ने आलू के उत्पादन को प्रभावित किया है। पिछले वर्ष की अपेक्षा अबकी आलू की पैदावार कम रहने की संभावनाएं हैं। अभी तक किसानों से मिल रहे फीडबैक के अनुसार, बारिश और नमी ने कई क्षेेत्रों में खेतों से आलू की निकासी पिछले साल की अपेक्षा 25 फीसदी तक कम हो रही है।
- डॉ. पीपी पाल, वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र
अभी तक करीब 30-35 फीसदी आलू की खोदाई में पिछले वर्ष की अपेक्षा आलू 25 फीसदी तक कम निकल रहा। कुछ क्षेत्रों में इसका प्रभाव है, मगर बलुई एवं दोमट मिट्टी वाले खेतों की स्थिति बेहतर है।
शत प्रतिशत आलू की खोदाई के बाद ही तय हो सकेगा कि आलू की उपज कितने प्रतिशत कम रह गई। जिन किसानों के खेतों में आलू कम निकल रहा, उनकी चिंता स्वाभाविक है। बारिश से आई नमी ने आलू की पैदावार को प्रभावित किया है।
- हरिओम, उद्यान निरीक्षक