हरदोई। जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज बने हुए पांच साल बीत चुके हैं। इसके बावजूद स्वास्थ्य व्यवस्थाएं बेहतर नहीं हुईं। आज भी गंभीर मरीज हायर सेंटर भेजे जाते हैं। जिले में नवजात शिशुओं के बेहतर उपचार की व्यवस्था तक उपलब्ध नहीं हो सकी है। स्पेशल न्यू बॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में आज भी न तो बेहतर व्यवस्थाएं हैं न ही बेहतर चिकित्सक। रोजाना एक से दो गंभीर हालत में आने वाले शिशुओं को बेहतर इलाज के लिए लखनऊ भेजा दिया जाता है।
नवजात बच्चों के लिए शुरुआती उपचार बेहद अहम होता है। जन्म के बाद सांस लेने में परेशानी, गंभीर संक्रमण और अन्य जटिलताओं से जूझ रहे शिशुओं को विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख की जरूरत होती है। जिला महिला अस्पताल में 30 बेड का एसएनसीयू वार्ड संचालित है लेकिन बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर सिर्फ वार्मर बेड के अतिरिक्त कुछ नहीं है। अस्पताल में बाल रोग चिकित्सक हैं लेकिन अगर कोई शिशु गंभीर बीमार होता है तो यहां के चिकित्सक उपचार करने के बजाए रेफर का पर्चा बना देते हैं। जो अभिभावक साधन संपन्न होते हैं। वह तो अपने गंभीर शिशु को बेहतर इलाज के लिए लखनऊ या दूसरे जिले लेकर चले जाते हैं लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर अपने बच्चे को लेकर भटकते हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों और संसाधन के अभाव में एसएनसीयू में बेहतर इलाज सिर्फ दूर की कौड़ी है।
एक दिन की बच्ची को किया रेफर
केस-1-
शहर से सटे चांद बेहटा निवासी जय सिंह की पत्नी रीना को बीते शुक्रवार को पुत्री हुई थी। जन्म से ही उनकी बेटी को सांस लेने और आंतों में संक्रमण की समस्या हो गई। महिला अस्पताल में एक दिन की जन्मी बच्ची को सिर्फ 18 घंटे रखा गया और इसके बाद चिकित्सकों ने उसको लखनऊ भेजने के कागज बना दिए गए। मजबूरी में पिता को अपनी एक दिन की बिटिया को लेकर लखनऊ हायर सेंटर भागना पड़ा।
पीलिया ग्रसित बच्चे की हुई मौत
केस-2-
टड़ियावां के भड़ायल गांव निवासी बबलेश की पत्नी अनुराधा ने भी एक पुत्र को जन्म दिया था। जन्म से पुत्र पीलिया की बीमारी से ग्रसित था। चिकित्सकों ने उन्हें भी लखनऊ ले जाने की सलाह दी। चूंकि अभिभावक आर्थिक रूप से कमजोर हैं और वह बच्चे को लेकर हायर सेंटर नहीं जा सके। अंतत: बच्चे की बाद में मौत हो गई।
एसएनसीयू में यह है स्टाफ
यूनिट में एक चिकित्सक के अलावा स्टाफ नर्स और वार्ड आया को मिलाकर महज 11 कर्मचारी ही उपलब्ध हैं। ऐसे में आठ-आठ घंटे की ड्यूटी के हिसाब से कर्मचारियों की रोस्टर ड्यूटी लगाई जा रही है।
पांच साल में भी नहीं सुधरी व्यवस्था
मेडिकल कॉलेज शुरू होने के बाद जिले के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की उम्मीद जगी थी, गंभीर मरीजों को बाहर न जाना पड़े इसके लिए संस्थान में सुविधाएं विकसित करने की जरूरत थी लेकिन एसएनसीयू की स्थिति इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है।
मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर करने का प्रयास लगातार हो रहा है। ट्रॉमा सेंटर का निर्माण हो रहा है, एसएनसीयू को भी बेहतर किया जाएगा। मेडिकल कॉलेज को मल्टी स्पेशल सुविधा युक्त अस्पताल बनने में समय लग सकता है। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य