हरदोई। अपर जिला जज प्रथम हरिहर प्रसाद यादव ने हत्या के अपराध में दोषी पाए जाने पर अभियुक्त को उम्र कैद और सात हजार जुर्माना भरने की सजा सुनाई। इधर,अपर जिला जज द्वितीय जय प्रकाश पांडेय ने गैर इरादतन हत्या के अपराध में तीन आरोपियों को दोष सिद्ध होने पर सात साल की सजा व प्रत्येक पर 25500 का अर्थ दंड लगाया।
बेनीगंज कोतवाली क्षेत्र के ग्राम गढीहार निवासी महेश 9 अप्रैल 2011 को रात 11 बजे खाना खाकर अपने घर के बाहरी हिस्से में लेटा था पास में ही चचेरा भाई रमाकांत लेटा था। इसी बीच गांव निवासी कमलेश गलत इरादे से महेश के घर में घुस आया। उसकी पत्नी के शोर करने पर रमाकांत और महेश मौके पर पहुंचे और दोनों ने कमलेश को घेर लिया।
इसी दौरान कमलेश ने बंदूक से गोली फायर कर दिया। गोली लगने से रमाकांत की मौत हो गई। महेश ने घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई। विवेचक ने अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया। अदालत ने मुकदमे की सुनवाई के बाद आरोपी पर दोष सिद्ध होने पर गुरुवार को उम्र कैद और शस्त्र अधिनियम के तहत भी एक साल की कै द व एक हजार अर्थदंड की सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी अपर जिला शासकीय अधिवक्ता सत्येंद्र कुमार सिंह ने की।
उधर, कासिमपुर थाना क्षेत्र के कुडौरी निवासी सूबेदार की बछिया उस्मान के खेत में चली गई थी इस पर दोनों के बीच विवाद हो गया था। आरोप है कि 7 अगस्त 2010 को शाम 5 बजे उस्मान, सद्दाम, जाबिर ने मिलकर सूबेदार को लाठियों से मारपीट कर लहूलुहान कर दिया था उपचार दौरान उसकी मौत हो गई। घटना की रिपोर्ट पर विवेचक ने अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। अदालत ने मुकदमे की सुनवाई के दौरान तीनों को दोषी पाए जाने पर गैर इरादतन हत्या में सजा सुनाई। मुकदमे की अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी एडीजीसी बजरंग बहादुर ने की।
अपहरण में जीजा-साले को उम्र कैद
हरदोई। अपर जिला जज पंचम हरवीर सिंह ने अपहरण के अपराध में दोष सिद्ध होने पर जीजा-साले को आजीवन कारावास और 15-15 हजार रुपये जुर्माना भरने के आदेश दिए।
माधौगंज थाना क्षेत्र के नरवापुरवा निवासी रामकरन उर्फ रिंकू के चचेरे भाई राम सागर की 17 अप्रैल 2013 को जयश्री के साथ शादी हुई थी। 21 अप्रैल को राम सागर घर से शौच करने के लिए गया था रास्ते से गायब हो गया, खोजबीन के बाद भी उसका पता नहीं चला।
रामकरन ने घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई। मुकदमे की विवेचना के दौरान पुलिस ने मामले का खुलासा किया कि माधौगंज थाना क्षेत्र के कामीपुर गांव निवासी शेर सिंह जयश्री की चचेरी बुआ का लड़का था। शादी के दो माह पहले शेर सिंह बहाने से जयश्री को अपने घर ले गया और उससे शादी के लिए दबाव बनाया। जयश्री ने शादी से इनकार कर दिया और किसी तरह से इसकी जानकारी पिता को दी।
पिता पुलिस के साथ शेर सिंह के घर पहुंचे और जयश्री को वापस घर ले आए। इसी बात से नाराज होकर शेर सिंह ने अपने बहनोई बलवीर निवासी पसनामऊ कोतवाली बिलग्राम के साथ मिलकर जयश्री की शादी होने के बाद उसके पति राम सागर का अपहरण कर लिया। जिसके बाद उसका पता न चला। अदालत ने अपहरण के लिए शेरसिंह व उसके जीजा बलवीर को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही दोनों पर 15-15 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया । अदालत ने अर्थदंड की धनराशि में से 20 हजार रुपये अपहृत रामसागर के विधिक जनों को बतौर क्षतिपूर्ति दिए जाने का आदेश दिए।