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बाबा के होंगे अलौकिक दर्शन

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मल्लावां। महाशिवरात्रि पर्व के लिए बाबा सुनासी नाथ का दरबार सजाया जा रहा है। पूरे मंदिर परिसर की साफ-सफाई की जा रही है। कोरोना संक्रमण का प्रभाव कम होने से अबकी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना है।
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मंदिर कमेटी और क्षेत्रीय लोगों के सहयोग से मंदिर की भव्यता देखते ही बनती है। यहां लखनऊ, कानपुर, उन्नाव, बाराबंकी, कन्नौज, सीतापुर से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।
इसी आधार पर पुलिस-प्रशासन ने भी तैयारियां शुरू कर दी हैं। करीब दो सदी पुराना सुनासीनाथ मंदिर अब सुंदर और अलौकिक नजर आता है। लोग बताते हैं कि कभी यह परिसर मुगल बादशाह औरंगजेब की बर्बरता की कहानी बयां करता था।
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16वीं शताब्दी में मुगल बादशाह औरंगजेब अपनी फौज और तलवारों के दम पर हिंदू मंदिरों को ध्वस्त करते हुए गंगा की तराई से पहुंचा था। बादशाह की इस मंदिर पर बुरी नीयत थी। वह इसे तोड़ना चाहता था।
इसकी भनक लगने पर गौराखेड़ा के शूरवीरों का बादशाह से सामना हो गया। दोनों ओर से तलवारें म्यान से बाहर निकल आई। युद्ध में खूनखराबा हुआ और सैकड़ों सैनिक मारे गए, लेकिन संशाधन सीमित होने से गौराखेड़ा के शूरवीर को बादशाह से शिकस्त मिली।
इसके बाद मंदिर के पास पहुंचने पर मुगल बादशाह को मढ़िया के गोस्वामियों का विरोध झेलना पड़ा, लेकिन यहां भी जीत मुगल बादशाह की हुई। बादशाह के आदेश पर सैनिक मंदिर को लूटने लगे।
उसने मंदिर में लगे दो क्विंटल के सोने का कलश उतरवा, फर्श में जड़ी सोने की गिन्नियां व सोने के घंटे लूटकर फौज को मंदिर को ध्वस्त करने का आदेश दिए, जिस पर मंदिर ध्वस्त कर दिया गया।
इसके बाद सैनिक शिवलिंग को खोदने लगे। इसमें सफल नहीं हुए तो बादशाह ने शिवलिंग को बीच से चीरने का आदेश दिया। इस पर सैनिकों ने आरे से शिवलिंग को काटने की कोशिश की, तो शिवलिंग से स्वत: दूध की धारा निकलने लगी।
यह देख सैनिकों ने आरा चलाना बंद कर दिया। किवदंती है कि इसी बीच दैवी प्रकोप से प्रगट हुई असंख्य ततैया ने बादशाह की फौज पर हमला बोल दिया, जिस पर सैनिक भाग खड़े हुए।
बर्रैया व ततैयों ने शुक्लापुर गांव तक फौज का पीछा किया। तब जाकर बादशाह व सैनिकों के प्राण बचे। उसी समय से शुक्लापुर गांव को सुकरौला कहा जाने लगा।
शिवलिंग पर आरे का निशान आज भी देखा जा सकता है।
कालांतर में ध्वस्त मंदिर का पुनर्निर्माण भगवंतनगर निवासी मिश्रा परिवार द्वारा कराया गया। मंदिर समिति के अध्यक्ष सत्यनारायण सेठ ने बताया कि पहले मंदिर 70 बीघा जमीन में था, पर जमीन को कुछ भूमाफिया ने कब्जा कर लिया फिर भी मंदिर को भव्यता देने की पूरी कोशिश की जा रही है।
मंदिर कमेटी के अध्यक्ष सत्यनारायण सेठ, कोषाध्यक्ष राधेमोहन गुप्ता, संजू पाठक का कहना है कि मंदिर को पर्यटक मंदिर घोषित कराने की मांग की जाती रही, लेकिन यह मांग अब तक पूरी नहीं हो सकी।
लोगों का कहना कि यदि इस मंदिर को पर्यटक स्थल घोषित कर दिया जाए तो लोगों को रोजगार का लाभ होगा। कमेटी ने केंद्रीय पर्यटक मंत्री से पर्यटक मंदिर घोषित करने की मांग की है।
अराजकतत्वों से परेशान हैं भक्त
मंदिर परिसर में अक्सर अराजकतत्वों का जमावड़ा लगा रहता है। कोषाध्यक्ष राधेमोहन गुप्ता, मुकेश कुमार, राजू, नीलेश आदि ने बताया कि अराजकतत्व कई बार मंदिर परिसर में रुकने वाले श्रद्धालु और आने जाने वाली महिला श्रद्धालुओं से छींटाकशी करते हैं।
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जिसकी शिकायत मंदिर कमेटी को कई बार मिल चुकी है। उन लोगों ने डीएम से मंदिर में पुलिस चौकी स्थापित कराए जाने की मांग की है।
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