शाहाबाद। भाजपा का टिकट न मिलने से नाराज दावेदारों ने बगावती तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। शाहाबाद से टिकट नहीं मिला तो नाराज अखिलेश पाठक ने विधानसभा चुनाव में निर्दलीय ताल ठोंकने का एलान कर दिया है। हालांकि उन्होंने अभी पार्टी की सदस्यता नहीं छोड़ी है।
अखिलेश पाठक ने रविवार को समर्थकों के साथ बैठक कर निर्दलीय चुनाव लड़ने का एलान किया। इसके साथ उन्होंने नामांकन पत्र खरीदने के बाद से उपजी अटकलों पर विराम लगाकर अपना पक्ष साफ कर दिया है। उन्होंने कहा कि दो फरवरी को वह निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। भाजपा उनकी रग-रग में है। लेकिन बाहरी व्यक्ति को टिकट देने से स्थानीय जनता में भारी आक्रोश है। वर्तमान विधायक जनता की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरी हैं। कार्यकर्ता पूरे कार्यकाल में उपेक्षित रहे। कार्यकर्ताओं का मान सम्मान ही सर्वोपरि होना चाहिए। जन भावनाओं का आदर कर चुनाव मैदान में उतरना उनकी मजबूरी है।
2012 के चुनाव में अखिलेश पाठक ने भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था। इसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद भी वह हमेशा पार्टी के कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लेते रहे। रजनी तिवारी के बसपा से भाजपा मेें शामिल होने के बाद पार्टी ने 2017 के चुनाव में अखिलेश पाठक के स्थान पर उन्हें टिकट दिया था। इस बार भी भाजपा से टिकट की उम्मीद लगाए अखिलेश पाठक को निराशा ही मिली है। भाजपा ने वर्तमान विधायक रजनी तिवारी को ही शाहाबाद से प्रत्याशी बनाया है। भाजपा के मीडिया प्रभारी गंगेश पाठक के मुताबिक उन पर विचार करके ही फैसला लिया जाएगा।
आवास पर लगा भाजपा का झंडा हटाया, मनाने का प्रयास
अखिलेश पाठक ने समर्थकों के भरोसे निर्दलीय चुनाव लड़ने का एलान करने के तुरंत बाद अपने आवास पर लगे भाजपा के झंडे को हटा दिया। उनके बागी तेवर देखकर पार्टी के कई नेता उन्हें मनाने आवास पर जा पहुंचे। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार चुनाव के समय अंदरूनी कलह पार्टी को नुकसान पहुंचा सकती है। भाजपा के विधानसभा क्षेत्र प्रभारी मनोज वर्मा, विस्तारक रोहित गुप्ता समेत कई भाजपाइयों ने अखिलेश को मनाने का प्रयास किया।