हरदोई। मेडिकल कॉलेज परिसर में 12 जून से खराब चल रही सीटी स्कैन मशीन बृहस्पतिवार को दुरुस्त हो गई।
बावजूद इसके मरीजों को फिलहाल राहत नहीं मिलेगी। वजह यह है कि मेडिकल कॉलेज परिसर की बिजली व्यवस्था में खामी है। न्यूट्रल को मिलने वाला अर्थिंग का करंट 4.5 वोल्ट तक जा रहा है। मशीन चलाने के लिए इसे एक वोल्ट से कम रखना जरूरी है। कुल मिलाकर ट्रांसफार्मर से निकले बिजली के तारों की वृहद जांच और मरम्मत के बिना कार्य नहीं हो पाएगा।
मेडिकल कॉलेज परिसर में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत सीटी स्कैन मशीन स्थापित कराई गई थी। यहां मरीजों का निशुल्क सीटी स्कैन कराया जाता है। 12 जून को मशीन खराब हो गई थी। तकनीकी विशेषज्ञों की जांच में पता चला था कि मशीन का एक्सरे ट्यूब खराब हो गया है। बुधवार को एक्सरे ट्यूब लेकर विशेषज्ञ मेडिकल कॉलेज पहुंचे थे।
बृहस्पतिवार सुबह एक्सरे ट्यूब सही हो गया, लेकिन इस बीच पता चला कि वोल्टेज के कम ज्यादा होने के कारण मशीन खराब हुई थी। नई एक्सरे ट्यूब की कीमत लगभग 50 लाख रुपये है। ऐसे में पीपीपी मॉडल में सीटी स्कैन मशीन संचालित कर रही कंपनी के तकनीकी विशेषज्ञों ने वोल्टेज की समस्या दूर होने तक मशीन का इस्तेमाल न करने की नसीहत टेक्नीशियन अंकित यादव को दी।
इसकी जानकारी पर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. जेबी गोगोई ने बिजली विभाग के अधिकारियों को सूचना दी। कोयल बाग कॉलोनी उपकेंद्र के एसडीओ कुलदीप शिवहरे और शहर के अवर अभियंता परमानंद मेडिकल कॉलेज पहुंचे। यहां कई घंटे की जांच के बाद पता चला कि ट्रांसफार्मर से सही करंट आ रहा है, लेकिन यहां से निकले तारों में कहीं कोई खामी है। इसकी वजह से न्यूट्रल से अर्थिंग का करंट 4.5 वोल्ट आ रहा है। इतने वोल्ट पर मशीन फुंक सकती है। एसडीओ ने बताया कि बिजली विभाग की तरफ से कोई समस्या नहीं है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन को वायरिंग की जांच और मरम्मत करानी चाहिए।
हर रोज निराश हाे रहे 50-60 मरीज
मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में आने वाले मरीजों काे कई बार जरूरत के मुताबिक सीटी स्कैन की सलाह दी जाती है। औसतन हर रोज 50-60 सीटी स्कैन यहां किए जाते थे। मशीन खराब होने के कारण पिछले 15 दिनों से मरीजों काे निराश लौटना पड़ रहा है। इनमें ज्यादातर मरीजों को प्राइवेट सीटी स्कैन कराना पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज में सीटी स्कैन की सुविधा निशुल्क है, जबकि प्राइवेट में न्यूनतम तीन हजार रुपये खर्च होते हैं।