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‘दूसरों को सुगंध बांटने से खुद होते सुगंधित’

Sat, 30 Aug 2014 05:30 AM IST
Hardoi
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हरदोई। अखिल विश्व गायत्री परिवार वृक्ष की शाखाएं स्वरूपी संगठन चारों तरफ हरियाली बिखेर रहे हैं। निश्चय ही यह शाखाएं जितनी मजबूती से फैलती जाएंगी, उतनी ही तेजी से समाज को देवत्व रूपी फल और छाया देने में मिशन सफल हो पाएगा।
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गायत्री शक्ति अशराफ टोला में शुक्रवार को हुए एक दिवसीय कार्यशाला में वरिष्ठ रामशंकर मिश्र ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार दूसरों को सुगंध बांटने से बांटने वाले का जीवन स्वयं सुगंधित हो जाता है, उसी प्रकार गुरु के ज्ञान प्रकाश को वितरित करने से सभी का जीवन प्रकाशित हो जाएगा। कहा कि पुराने बनाए गए प्रज्ञा मंडलों को सक्रिय किया जाए। हर गांव में कम से कम पांच व्यक्ति समूह बनाकर साधना करें। शांतिकुंज से आए अनिल तिवारी ने कहा कि अपने सत्कार्य रूपी बीज को भगवान के खेत में बोने का प्रयास करो, ताकि उसका अनंत गुना फल प्राप्त हो।
कहा कि हमारे समाज का बहुत बड़ा भाग पाश्चात्य सभ्यता की ओर भागता जा रहा है। यदि बुद्धिजीवी वर्ग क्रियाशील न हुए तो भावी पीढ़ी दुर्गा माता के चित्र को देखकर दुर्गा माता के स्थान पर शेर पर बैठी लेडी बताएगी। कार्यक्रम का शुभारंभ गायत्री मंत्र एवं गुरू वंदना से हुआ। शांति कुं ज हरिद्वार से आए प्रतिनिधियों का चंदन तिलक लगाकर स्वागत किया गया। संचालन हरिहर वत्स सिंह ने किया। इस मौके पर बसंत गुप्ता, पीसी शुक्ल, भगवत शरण अवस्थी, संजय सिंह, शिशुपाल सिंह आदि मौजूद थे।
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