हरदोई। महाराज सिंह पार्क सदर बाजार में सुंदरकांड सेवा समिति रामजानकी परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा वर्णन कार्यक्रम के पांचवें दिन आचार्य रामजी भाई ने समुद्र मंथन प्रसंग को सुनाया। बताया कि देवताओं ने दैत्यों साथ मिलकर मंदराचल पर्वत की मथेनी बनाकर बासुकी नाग की रस्सी से समुद्र मंथन किया, जिसमें 14 रत्न प्राप्त हुए।
हलाहल विष शिवजी ने पान करके देवताओं को विजय का आशीर्वाद दिया। भगवान ने स्वयं देवताओं को अमृत पिला कर मोहिनी रूप धारण किया। राहु का सर काटा जिसे राहु-केतु नवग्रह में शामिल हो गए।
नौ ग्रहों का पूजन राहु केतु के साथ किया जाता है। कथा वर्णन व्यास ने गजेंद्र मोक्ष की कथा सुनाते हुए कहा कि जीव जब परमात्मा की शरण गति स्वीकार करता है तो परमात्मा बैकुंठ छोड़कर अपने भक्तों की रक्षा सुरक्षा करते हैं।
कहा कि अमरीश राजा भगवान के परम सेवक थे। स्वयं भगवान की सेवा करते निराहार रहकर भगवान की एकादशी का व्रत करते। यह व्रत तीन दिन का होता है।
एक दिन पूर्व भोजन का त्याग करना दूसरे दिन व्रत रखना तीसरे दिन द्वादशी में इस व्रत का पारायण किया जाता है। यह व्रत करने वाले भक्त परमधाम को प्राप्त करते हैं।
कथा व्यास ने दशम स्कंध की कथा सुनाते हुए भगवान श्रीकृष्ण के अवतार की कथा भक्तों को सुनाई जिसमें बड़ी ही सुंदर झांकी प्रस्तुत की गई। सभी भक्तों ने मिलकर कढ़ी चावल बूंदी फल का प्रसाद वितरित किया गया।
10 अप्रैल को विशाल जागरण का आयोजन तथा दोपहर में राम जन्मोत्सव का भव्य आयोजन किया जाएगा ।