आंधी, बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को हुई क्षति का जिला प्रशासन ने सर्वे लगभग पूरा करा लिया है। सर्वे में प्रशासन ने सिर्फ 20 प्रतिशत नुकसान दिखाया है। इससे साफ है कि जिले के किसानों को कोई मुआवजा नहीं मिलेगा।
डीएम अनिल ढींगरा के निर्देश पर हापुड़, गढ़ और धौलाना के तहसीलदारों और जिला कृषि अधिकारी ने आंधी बारिश और ओलावृष्टि से हुई क्षति का सर्वे कराया है। सूत्रों की माने तो सर्वे करने वाली टीमों ने कुछ ही स्थानों पर अधिकांश स्थानों पर आंशिक नुकसान ही माना है।
कुल मिलाकर 20 प्रतिशत नुकसान की रिपोर्ट दी गई हैं। जबकि किसी भी आपदा में फसलों को 33 प्रतिशत से कम ही नुकसान होने पर किसानों को कोई मुआवजा दिये जाने का प्राविधान नहीं है। इतना ही नहीं ऐसे में शासन से भी मुआवजा नहीं मांगा जा सकता।
एडीएम हरीश चंद का कहना है कि उन्होंने तीनों तहसीलदारों तथा जिला कृषि अधिकारी से बात की है, जिन्होंने यही बताया है कि फसलों को सिर्फ 20 प्रतिशत क्षति हुई है।
गांव विशेष को मिल सकता है पैसा
एडीएम हरीश चंद का कहना है कि अगर किसी गांव में फसलों को 33 प्रतिशत से अधिक के नुकसान की रिपोर्ट आई तो उन्हें मुआवजा मिल सकता है। फसल गिरने से गेहूं की बाली में दाना कमजोर पड़ना निश्चित है। मटर सरसों और सब्जियों को भारी नुकसान हुआ है।
जिला प्रशासन के माध्यम से इस रिपोर्ट को शासन को भेजा जाएगा। पीड़ित किसानों को शासन स्तर से बहुत जल्द आर्थिक मदद मिलनी संभव होगी। गढ़ क्षेत्र में 30 फीसदी और सिंभावली क्षेत्र में इससे भी अधिक नुकसान होने का अनुमान है।
तहसील प्रशासन कृषि विभाग के आकलन से संतुष्ट नहीं है। अब राजस्व विभाग समेत हलका लेखपालों के माध्यम से गाटावार सर्वे शुरू हो गया है। ताकि मुआवजा वितरण में कोई भी धांधली न हो पाए। तहसीलदार भगत सिंह ने बताया कि आंधी, बारिश और ओलावृष्टि से फसलों के नुकसान का गाटावार सर्वे कराया जा रहा है।