सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश के बाद शहर में खुलेआम चल रही हड्डी मिलों को सील करने पहुंची प्रशासन और नगर पालिका की टीम में कागजात पर साइन करने को लेकर हुए मतभेद के बाद बिना कार्रवाई के लौट आई।
अब प्रशासन का कहना है कि मोहर्रम के बाद यह कार्रवाई की जाएगी। दअसल, शहर में दर्जनों हड्डी मिले और अवैध गोदाम संचालित हो रहे हैं, जिससे निकलने वाली दुर्गंध से आसपास के लोग बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित है। कोर्ट ने नगर पालिका को 6 अक्तूबर को इन मिलों और गोदामों के निरीक्षण कर हड्डी मिलों और गोदामों को सील करने के आदेश दिए थे।
आदेशों के अनुपालन में बृहस्पतिवार दोपहर एसडीएम मीनू राणा,
सीओ विशाल यादव, पालिका ईओ संजय मिश्रा, प्रदूषण विभाग के सहायक अभियंता जेबी सिंह टीम के साथ रामपुर रोड पर पहुंचे, जिससे मिल प्रबंधकों में हड़कंप मच गया। टीम ने यहां पशुओं की खालों और अवशेषों के दो गोदामों को सील करने की कार्रवाई शुरू की।
इसी बीच, कागजात पर एसडीएम और सीओ ने हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया। उनका कहना था कि प्रशासन केवल कानून व्यवस्था बनाने के लिए हैं जबकि नगर पालिका को ही यह कार्रवाई पूरी करनी है।
इसके बाद टीमें बिना कोई गोदाम सील किए कार्रवाई को बीच में छोड़कर लौट आई। अब नगर पालिका मोहर्रम के बाद कार्रवाई करने की बात कह रही है। हालांकि बिना कार्रवाई हड्डी मिलों और गोदामों को समय देकर टीम का लौटना आसपास के लोगों को हजम नहीं हो रहा है।
प्रदूषण विभाग के सहायक अभियंता जेबी सिंह का कहना है कि नगर पालिका मोहर्रम के बाद कार्रवाई करेगी। जबकि नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी संजय मिश्रा का कहना है कि कार्रवाई के दौरान कुछ कागजातों की कमी रह गई थी, जिसे पूरा किया जा रहा है। मोहर्रम के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
एसडीएम मीनू राणा का कहना है कि वह सीओ विशाल यादव के साथ केवल कानून व्यवस्था संभालने के लिए गई थी। कार्रवाई नगर पालिका और प्रदूषण विभाग की टीम को करनी थी। पालिका की टीम को लौट होने के बाद प्रशासन की टीम भी लौट आई।