शुगर मिल बंद हो गई है, जबकि खेतों में सैकड़ों बीघा गन्ने की फसल खड़ी है। अभी किसानों का सैकड़ों करोड़ का गन्ना पेमेंट बाकी है। इससे आर्थिक तंगी में ब्याज पर कर्ज लेने वाले किसानों को दिक्कत झेलनी पड़ रही है।
गर्मी के सीजन में सूखा और बिजली संकट समेत मौसम की बेरुखी की मार झेलने के बावजूद किसानों की दिक्कत बढ़ती जा रही हैं। धरना, प्रदर्शन और आंदोलन के बाद पिछले वर्ष के बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान इस साल दिसंबर में मिल पाया था।
वर्तमान पेराई सत्र से जुड़े गन्ना मूल्य के सैकड़ों करोड़ का भुगतान नहीं मिला है। सिंभावली शुगर मिल प्रबंधन ने अपना मौजूदा पेराई सत्र बंद कर किसानों के सामने नई दिक्कत खड़ी कर दी है। खेतों में खड़े हजारों कुंतल गन्ने को लेकर जहां उनकी धड़कनें बढ़ रही हैं, वहीं इस बार का गन्ना मूल्य आखिर कब मिल पाएगा? इसको लेकर भी किसान बुरी तरह बेचैन हैं।
हाईकोर्ट ने खेतों में गन्ना शेष रहने तक मिल बंद होने पर किसानों को गन्ना मूल्य का पेमेंट अदा करने की हिदायत दी हुई है। उसके बाद भी सिंभावली शुगर मिल प्रबंधन ने क्षेत्र में पेराई के लिए अपेक्षित गन्ना उपलब्ध न होने का हवाला देकर पेराई सत्र बंद कर दिया है।
अगर हकीकत देखी जाए तो अभी क्षेत्र में हजारों कुंतल गन्ने की फसल बाकी हैं। गन्ना समिति सचिव राजीव सेठ ने बताया कि मौजूदा पेराई सत्र के दौरान सिंभावली शुगर मिल ने कुल 130.46 कुंतल गन्ने की खरीद की थी, जिसका कुल मूल्य 400 करोड़ 95 हजार रुपया होता है।
जिसमें मिल प्रबंधन ने अब तक 137 करोड़ रुपये का भुगतान ही किया है। जिससे शुगर मिल पर किसानों का 263.60 करोड़ रुपये का पेमेंट बकाया है।