टूटी पटरी से होकर शुक्रवार को कई ट्रेन धड़ाधड़ निकल गईं। इससे बड़ा हादसा होते-होते रह गया। हालांकि रेलवे में लाइन में फ्रेक्चर होने का पता लगते ही सप्तक्रांति एक्सप्रेस समेत तीन ट्रेनों को आनन फानन में रोक लिया गया।
ट्रैक की मरम्मत के बाद ही ट्रेनों का संचालन शुरू हो सका। इसको रेलवे अफसरों की बड़ी लापरवाही माना जा रहा है। सर्दी में ट्रैक फ्रेक्चर होने की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में अधिकारी निगरानी भी बढ़ा देते हैं, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।
रेलवे के अफसर लंबी तानकर सो रहे हैं। पिछले दिनों कई बड़े ट्रेन हादसों के बाद गाइडलाइन जारी होने के बावजूद रेलवे अफसर सतर्क नहीं हैं। यदि ऐसा होता तो शुक्रवार को कई ट्रेन टूटी पटरी से होकर नहीं निकलती।
तेज गति से निकलने वाली कई एक्सप्रेस ट्रेन टूटी पटरी पर बड़े हादसे का शिकार हो सकती थीं। क्षेत्र के गांव अठसैनी के पास शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे कुछ बच्चे रेलवे लाइन के पास क्रिकेट खेल रहे थे। उनकी गेंद ट्रैक पर पहुंच गई।
बच्चे गेंद उठाने पहुंचे तो रेलवे लाइन टूटी देख उनके होश उड़ गए। बच्चों ने खेल छोड़कर गेटमैन जयनारायण मीना को इसकी सूचना दी। उसने आनन फानन में दिल्ली की तरफ जा रही सप्तक्रांति एक्सप्रेस को लाल झंडी दिखाकर रोक दिया और फिर गढ़ स्टेशन पर अधिकारियों को ट्रैक फ्रेक्चर की सूचना दी।
रेलवे ट्रैक में फ्रेक्चर की खबर मिलते ही स्टेशन प्रबंधन ने आला हजरत को गढ़ और जन साधारण एक्सप्रेस को ब्रजघाट गंगा पुल की दूसरी साइड में काकाठेर स्टेशन पर रुकवा दिया। दिल्ली की ओर से आने वाली ट्रेनों को भी पीछे ही रुकवा दिया गया।
जिससे बड़ा हादसा बाल बाल टल गया। सूचना मिलते ही इंजीनियर प्रवीण कुमार समेत रेलवे पेट्रोलिंग कर्मियों का अमला मौके पर पहुंच गया। टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद ट्रैक में हुए फ्रेक्टर को करीब 35 मिनट में ठीक किया।
तब कहीं जाकर सप्तक्रांति 45, आला हजरत 25 और जन साधारण 20 मिनट बाद अपने गंतव्य स्थल की तरफ रवाना हो पाईं। स्टेशन मास्टर कृष्ण कुमार का कहना है कि रेलवे लाइन में फ्रेक्चर होने से सप्तक्रांति, आला हजरत और जन साधारण एक्सप्रेस को अठसैनी, गढ़ और काकाठेर में रोकना पड़ा था।
सर्दी और कोहरे में ट्रैक फैक्चर होने की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में सर्दी शुरू होते ही ट्रैक की निगरानी के लिए विशेष गाइडलाइन जारी की जाती हैं। रात भर पेट्रोलिंग टीमों को ट्रैक पर गस्त करनी होती है।
दिल्ली-लखनऊ रूट का यह ट्रैक बेहद व्यस्त है। इससे होकर कई महत्वपूर्ण एक्सप्रेस ट्रेन निकलती हैं। ऐसे में निगरानी में लापरवाही यात्रियों के जीवन पर भारी पड़ सकती थी। पिछले दिनों ही ब्रजघाट में ट्रेन डिरेल होने से कई यात्री घायल हुए थे।
रेलवे में अपने स्तर से ट्रैक फ्रेक्चर होने और निगरानी में लापरवाही की जांच शुरू कर दी है, लेकिन सुरक्षा कारणों से कोई अधिकारी खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। अभी विशेषज्ञों की टीम इसकी भी जांच करेगी कि ट्रैक फ्रेक्चर होने का सर्दी ही था या अन्य कोई।