जंगली जानवरों और गंगा में रहने वाले दुर्लभ जलीय जीवों पर मंडरा रहे गंभीर खतरे के मद्देनजर सामाजिक संगठनों ने रामसर साइट में अवैध बालू खनन और पालेज की रोकथाम की मांग की है। अवैध खनन से जलीय जीवों के जीवन पर खतरा मंडरा रहा है।
शासन की रोक के बावजूद स्थानीय स्तर पर ब्रजघाट से पूठ तक अवैध खनन धड़ल्ले से चल रहा है। जंगली जीवों और गंगा में रहने वाली डॉल्फिन समेत दुर्लभ प्रजाति के जलीय जीवों को संरक्षण देने के लिए सरकार ने बिजनौर से गढ़-ब्रजघाट होकर
बुलंदशहर के नरौरा तक गंगा की दोनों साइडों वाले क्षेत्र को रामसर साइट घोषित किया हुआ है। इसमें बालू खनन, मछलियों का शिकार, पेड़ों के कटान, फसलों में रासायनों के इस्तेमाल और शोर करने वाली मशीनों के संचालन पर रोक लगाई हुई है।
इसके बाद भी गंगा किनारे रामसर आरक्षित क्षेत्र में बालू के अवैध खनन और पालेज की रासायनिक खेती धड़ल्ले से हो रही हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल, पर्यावरण प्रदूषण बोर्ड, वन विभाग, वाइल्ड लाइफ, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ
जैसे कई सरकारी और सामाजिक संगठन गंगा को साफ रखने की योजना चला रहे हैं। इसके बाद भी रामसर साइट पर अवैध खनन हो रहा हैं। अब सामाजिक संगठन पीपुल फोर एनिमल ने प्रदेश स्तर पर रामसर साइट को अवैध खनन से मुक्त कराने की मुहिम चलाई है।
प्रदेश इंचार्ज डॉ.रविंद्र शुक्ला का कहना है कि बालू खनन और रासायनिक खादों से जुड़ी पालेज की खेती से जंगली जानवरों, डॉल्फिन व दुर्लभ जलीव जंतुओं के अस्तित्व को खतरा है।
इसके मद्देनजर शिकायत पर लखनऊ से वन विभाग के एडिशनल प्रिंसिपल चीफ कंजर्वेटर वीके सिन्हा के नेतृत्व में कंजर्वेटर पीपी सिंह और डीएफओ पीएन सिंह ने बृहस्पपतिवार को रामसर साइट का दौरा किया।
वीके सिन्हा ने बताया कि रामसर साइट क्षेत्र में प्रतिबंधित गतिविधियां संचालित होना जंगली व जलीय जीवों, डॉल्फिन के लिए खतरा है। इसकी रिपोर्ट शासन और एनजीटी को सौंपी जाएगी।