हापुड़। बड़े और संवेदनशील मामलों में भी हापुड़ पुलिस कितनी गंभीर है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राजा जी हवेली ढाबा पर हुए हादसे में एक युवक की दर्दनाक मौत हो गई, लेकिन पुलिस पर इसमें लापरवाही करने व आरोपियों से मिलीभगत का आरोप लग रहा है। लोगों को झकझोर देने वाली घटना के तीन दिन तक पुलिस तहरीर को दबाकर बैठी रही और बाद में आर्थिक मदद का लालच देकर पूरा मामला हादसे में खुद ही तब्दील कर दिया।
30 जून को राजा जी हवेली ढाबा पर हुए हादसे में बुलंदशहर के गांव निवासी अजीतपाल की मौत हो गई थी। घटना इसलिए अधिक मायने रखती थी कि तीन भाइयों का इकलौता पुत्र अजीत किसी की लापरवाही या रंजिश का शिकार हो गया। घटना के तरीके से हर किसी को लग रहा था कि यह घटना हत्या हो सकती है। लेकिन पुलिस शुरू से ही मामले में हीलाहवाली करती रही।
बड़े और फायदे के मामले में खुद ही तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराने वाली पुलिस पहले दिन से ही परिजनों से तहरीर न मिलने की बात कहती रही। जबकि तहरीर सोशल मीडिया पर लगातार वायरल हो रही थी, इसमें परिजनों ने हत्या का आरोप लगाया था। कहने को तो पुलिस ने घटना के खुलासे के लिए तीन टीम होने का दावा किया, लेकिन किसी प्रकार की प्रगति नहीं हुई। हालांकि पुलिस सूत्रों की ओर से आरोपियों के पक्ष वाले बयान आने जरूर शुरू हो गए थे। कुल मिलाकर चौथे दिन पुलिस ने अचानक परिजनों से वार्ता की और सीसीटीवी मोबाइल की लोकेशन जैसे साक्ष्याें को दरकिनार करते हुए चार दिन बाद भी केवल अज्ञात चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया।
चालक की मौजूदगी में भी हो सकता है खेल -
घटना में मृतक के परिजनों के बैकफुट पर आने के बाद लोगों का कहना है कि पुलिस चालक के मामले में भी खेल कर सकती है। पहले बताया जा रहा था कि घटना के दौरान कार मालिक का बेटा और उसका दोस्त कार में सवार थे। लेकिन अब पुलिस इस मामले में किसी की भी गिरफ्तारी दिखा सकती है। हालांकि फिलहाल पांच दिन बाद भी पुलिस की ओर से अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं की गई है।
कोट -
घटना को लेकर सभी बिंदुओं पर गहनता से जांच की गई थी, परिजनों की ओर से जो तहरीर प्राप्त की गई, उसके आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया। जल्द की कार के चालक को गिरफ्तार किया जाएगा। - जितेंद्र कुमार शर्मा, सीओ।