साहिबाबाद। जलापूर्ति की गुणवत्ता लगातार बिगड़ती जा रही है। मोहन नगर, वैशाली, वसुंधरा, कौशांबी और इंदिरापुरम जैसे इलाकों में नलों से आने वाले पानी का टीडीएस स्तर 500 से 1000 तक पहुंच गया है जबकि मानक सीमा 500 मानी जाती है। इससे पानी का स्वाद खारा हो गया है और कई जगहों पर बदबू आने की शिकायतें भी मिल रही हैं। वहीं दूसरी तरफ दूषित पानी की वजह से हर महीने लोगों को तीन हजार रुपये तक बाजार में खर्च कर बोतल बंद पानी खरीदना पड़ रहा है।
वसुंधरा सेक्टर-15 में रहने वाले संदीप शर्मा बताते हैं नल का पानी पीने लायक नहीं है। आरओ भी बार-बार खराब हो जाता है। अब मजबूरी में 20-लीटर की बोतल 80-100 रुपये में खरीदनी पड़ती है। इसी तरह वैशाली सेक्टर तीन की नीतू अग्रवाल ने बताया कि हम हर महीने लगभग तीन हजार रुपये केवल पीने के पानी पर खर्च कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि उच्च टीडीएस का मतलब है कि पानी में घुलित ठोस पदार्थों की मात्रा अधिक है। यह खनिज, नमक या रासायनिक अवशेष हो सकते हैं, जो लंबे समय तक सेवन करने पर किडनी और पाचन संबंधी समस्याएं पैदा कर सकते हैं। वहीं डीएलएफ कॉलोनी के सोनू भाटी ने बताया कि आए दिन सप्लाई हो रहे पानी में बदबू और गंदगी की शिकायत सामने आती हैं। इसके चलते ना सिर्फ लोगों को बीमारी का खतरा बना हुआ है। बल्कि दिनचर्या के कामों पर भी इसका दुष्प्रभाव देखने को मिल रहा है।