प्रतिबंधित इंजेक्शन ऑक्सीटॉक्सिन का देहात अंचल में पशुओं पर जमकर प्रयोग किया जा रहा है। परचून की दुकानों पर 10-50 रुपये में यह इंजेक्शन आसानी से मिल जाता है। पशुपालक ऐसे पशुओं पर इसका का प्रयोग करते हैं, जो दूध नहीं देतीं।
इंजेक्शन लगाने के कुछ ही मिनटों में पशु दूध देना शुरू कर देती हैं। इस इंजेक्शन के प्रयोग से पशुओं में बांझपन की समस्या दिनोंदिन बढ़ रही है। बीते दिनों जिले में ऑक्सीटाक्सिन बनाने वाली एक फैक्ट्री पर छापामार कार्रवाई कर भंडाफोड़ किया गया था।
उक्त फैक्ट्री को सील किए जाने के बाद प्रशासनिक अधिकारी बेशक यह समझ रहे हों कि जिले में अब इसकी बिक्री बंद हो गई हो, लेकिन ऐसा नहीं है। देहात अंचल में ऑक्सीटॉक्सिन इंजेक्शन का कारोबार खूब फल फूल रहा है। आलम यह है कि देहात अंचल में परचून की दुकान तक पर आसानी से यह इंजेक्शन मिल जाता है।
पशुओं को ऑक्सीटाक्सिन का इंजेक्शन लगातार देने से उनमें बांझपन की समस्या बन जाती है। काफी प्रयास के बाद भी गाय, भैंस गर्भित नहीं हो पाती हैं। ऐसे में पशुपालकों को अपना पशु बेचने को मजबूर होना पड़ता है।
ऑक्सीटाक्सिन के इस्तेमाल के बाद यदि वही दूध हम पीते हैं तो इसका शरीर पर बुरा असर पड़ता है। इसके सेवन से बच्चे का शारीरिक विकास रुक जाता है और हड्डियां बेहद कमजोर हो जाती हैं। मानसिक क्षमता भी कमजोर हो जाती है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. वाईपी सिंह का कहना है कि इस इंजेक्शन का प्रयोग पशु पर करना गलत है। यह प्रतिबंधित है। पशुओं में बांझपन की समस्या इसी के कारण बढ़ रही हैं। जल्द ही देहात अंचल में छापेमारी करवाई जाएगी।