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Hapur News: पालिका के वाहनों का नहीं प्रदूषण प्रमाणपत्र, बिना डीजल दिए लौटाए

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पेट्रोल पंप पर प्लास्टिक की केन में डीजल देते कर्मचारी। संवाद
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हापुड़। जिले में एक अक्तूबर से लागू हुए नो पीयूसी, नो फ्यूल नियम के बाद पेट्रोल पंपों पर वाहन चालकों और संचालकों के बीच विवाद की स्थिति बनने लगी है। शुक्रवार को प्रदूषण प्रमाण-पत्र (पीयूसी) नहीं होने पर जब नगर पालिका के कुछ वाहन बुलंदशहर रोड स्थित पेट्रोल पंप पर डीजल लेने पहुंचे तो प्रमाणपत्र नहीं होने पर उन्हें डीजल नहीं दिया गया।
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वहीं, किसान भी ट्रैक्टरों को पंप तक ले जाने से बच रहे हैं। कई किसान केन में डीजल भरवाकर ले जा रहे हैं। शासन के निर्देश के बाद जिले के सभी पेट्रोल पंपों पर वैध प्रदूषण प्रमाणपत्र वाले वाहनों को ही पेट्रोल-डीजल देने की व्यवस्था लागू की गई है। इसके बाद से ऐसे वाहन जिनका पीयूसी नहीं बना है या जिसकी वैधता समाप्त हो चुकी है, उनके सामने परेशानी खड़ी हो गई है।
इन्हें पेट्रोल व डीजल न देने के आदेश हैं। यह आदेश सभी प्रकार के वाहनों पर लागू है। ऐसे में बिना प्रदूषण प्रमाण-पत्र के दौड़ रहे नगर पालिका के सफाई और अन्य कार्यों में इस्तेमाल होने वाले वाहनों को भी ईंधन लेने में दिक्कत आ रही है।
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नगर पालिका के वाहनों में बुलंदशहर रोड स्थित एक पंप से पेट्रोल व डीजल डलवाया जाता है। शुक्रवार को पालिका के वाहनों के पंप पर पहुंचने के दौरान संचालकों ने पीयूसी प्रमाणपत्र मांगा, प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं होने पर डीजल देने से मना कर दिया गया। इससे वाहन वापस लौट गए। कर्मचारियों के सामने वाहन खड़े रहने और काम प्रभावित होने की स्थिति भी बनी।

ट्रैक्टर पंप तक ले जाने से बच रहे किसान
ग्रामीण क्षेत्रों में किसान ट्रैक्टर लेकर पेट्रोल पंप पर जाने से बच रहे हैं। किसानों का कहना है कि ट्रैक्टर का पीयूसी नहीं होने की स्थिति में डीजल नहीं मिलने का डर रहता है। ऐसे में कई किसान खाली केन लेकर पंप पर पहुंच रहे हैं और उसमें डीजल भरवाकर खेत या घर ले जा रहे हैं।



असमंजस में पंप संचालक

पंप संचालक विपिन सचदेवा ने बताया कि नियम का पालन कराना जरूरी है लेकिन पीयूसी को लेकर वाहन चालकों के साथ रोजाना बहस हो रही है। कुछ वाहन चालक नियम में छूट देने की मांग करते हैं। इससे पंपों पर विवाद की स्थिति बन रही है। अधिकारियों के स्तर से भी लोगों को पीयूसी बनवाने और वाहनों के दस्तावेज दुरुस्त रखने के लिए जागरूक किया जा रहा है। जनरेटर और मशीनों के लिए अनुमति के बाद डीजल केन में दिया जा रहा है।

नो पीयूसी, नो फ्यूल नियम सभी पर लागू है। इसमें किसी को भी छूट नहीं मिलेगी। पंप संचालकों को सख्त निर्देश हैं कि वाहनों में सीधा पेट्रोल-डीजल डाला जाए। यदि किसी पंप पर केन में तेल दिया जाना मिलता है तो फिर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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- डॉ. सीमा सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी
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