दीपावली पर बाजार में मिलावटखोरी का धंधा तेजी से फल फूल रहा है। उपभोक्ताओं को मिलावटी माल बेचा जा रहा है। शहरवासियों की सेहत मिलावटखोरों के निशाने पर है। अफसरों द्वारा छापामारी तो हो रही है, लेकिन यह कार्रवाई सीमित दायरे तक है।
असली मिलावटखोर बेरोकटोक बाजार में नकली दूध, पनीर, खोया, रिफाइंड और देशी घी बेचकर लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं और मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। सिंथेटिक मावे के साथ मिठाइयों में कृत्रिम रंगों का इस्तेमाल हो रहा है।
खास बात यह है कि काजू कतली भी मिलावट से बची नहीं है। इसमें काजू की जगह मूंगफली का चूरा मिलाया जा रहा है। छह सौ रुपये किलो बिकने वाली काजू कतली डेढ़ सौ रुपये की लागत में तैयार हो जाती है। वहीं, खांड के बनने वाले बताशे भी चीनी से बनाए जा रहे हैं।
त्योहारी सीजन में मिलावटी सरसो का तेल बनाने का धंधा भी जोरों पर है। धान की भूसी से बनने वाला राइस ब्राउन ऑयल में मिलावटखोर पीला रंग डालकर उसे सरसो के तेल के रूप में बेच रहे हैं। इस तेल को बनाने में 35 रुपये की लागत आती है। बाजारों में इसे 80 और 100 रुपये लीटर तक बेचा जाता है।
सूत्रों का कहना है कि इस समय बाजार में मिलावटी दूध, मावा और बेसन का धंधा जोरों पर है। मिलावटखोर पैसे कमाने के चक्कर में लोगों के सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। जानकारों की मानें तो केमिकल के घोल से तैयार हुए नकली दूध में
चिकनाई लाने के लिए रिफांइड ऑयल का प्रयोग किया जाता है। यह खराब न हो इसके लिए हाइड्रोजन पैरॉक्साइड डाला जाता है। इस तरह बनाए गए एक लीटर दूध की कीमत करीब 15 रुपये बैठती है। वहीं, दूध पाउडर में चिकनाई के लिए रिफाइंड मिलाकर मावा तैयार किया जा रहा है।
खोया और मिठाई का वजन बढ़ाने के लिए उसमें मैदा और आलू मिलाई जाती है। उधर, चना महंगा होने के चलते मैदे में रंग मिलाकर बाजार में उसे बेसन कहकर भी बेचा जाता है।
तहसील क्षेत्र के ग्राम सलाई, कांठीखेड़ा, खडख़ड़ी, हिंडालपुर, छिजारसी, बड़ौदा सिहानी के अलावा गढ़मुक्तेश्वर और धौलाना क्षेत्र में मिलावटी मावे और पनीर का धंधा तेजी से पनप रहा है। यहां से जिले के साथ साथ आसपास के शहर में भी माल भेजा जा रहा है।
श्री शांति स्वरूप भौतिक मंच के संयोजक अजय मित्तल कहते हैं कि उपभोक्ता थोड़ी सी जागरूकता से मिलावट से बच सकते हैं। नकली सरसों का तेल को परखने के लिए उसे पानी के साथ मिलाकर हाथों पर रगड़ें। नकली होगा तो थोड़ी देर में रंग छोड़ देगा।
इससे आंखों में भी चुभन होगी। काजू कतली को परखने लिए उसके स्वाद को गौर से महसूस करें। नकली बेसन को पानी में डालकर छोड़ दें। थोड़ी देर में रंग ऊपर आ जाएगा। वहीं, नकली दूध में चीनी का अधिक प्रयोग करें, सूंघने पर केमिकल की गंध आएगी।
बोले डॉक्टर
डॉ. पराग शर्मा ने बताया मिलावटी खाद्य पदार्थ का सेवन करने से सेहत पर काफी असर पड़ता है। बच्चे और डायबिटीज के रोगियों को सबसे अधिक परेशानी होती है। इससे पेट संबंधी अनेक रोग हो जाते हैं। मिलावटी सामान सेहत के लिए हानिकारक हैं। इसका किसी भी हाल में सेवन न करें।
मिलावटखोरों पर होगी कार्रवाई
जिलाधिकारी अनिल ढींगरा ने बताया कि सभी एसडीएम और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया है कि मिलावटखोरों को किसी भी हाल में न बख्शा जाए। मिलावटखोरी किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
वहीं, अभीहित अधिकारी अर्चना धीरान का कहना है कि मिलावटी सामान की बिक्री रोकने के लिए विभाग की कार्रवाई जारी है। इसके लिए लगातार नमूने लिए जा रहे हैं।
क्या है सजा
मिलावट खोरी को रोकने के लिए बने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के अनुसार नमूना फेल होने पर आरोपी पर दस लाख रुपये तक का जुर्माना और उम्रकैद तक की सजा हो सकती है।