हापुड़ में साल 2014 में कुचेसर चौराहे पर युवक व युवती की धारदार हथियारों से वार कर हत्या के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश/ विशेष न्यायाधीश एससी एसटी एक्ट कोर्ट ने पांच को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही प्रत्येक पर 70-70 हजार का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड न देने पर सजा बढ़ा दी जाएगी।
हापुड़ के कुचेसर चौराहे पर आठ साल पहले प्रेमी युगल की धारदार हथियार से हत्या के मामले में युवती के परिजनों को अदालत ने दोषी करार दिया है। अपर सत्र न्यायाधीश/ विशेष न्यायाधीश एससी एसटी एक्ट कोर्ट ने ऑनर किलिंग के इस मामले में दो भाईयों समेत पांच लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही प्रत्येक पर 70-70 हजार का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड न देने की स्थिति में आठ माह की सजा बढ़ा दी जाएगी।
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विशेष लोक अभियोजन अधिकारी एससी एसटी कोर्ट विनीता त्यागी ने बताया की कुचेसर रोड चौराहा निवासी सत्यवान ने 29 नवंबर 2014 को बाबूगढ़ थाने में एक तहरीर दी थी। जिसमें उन्होंने कहा कि उनका 20 वर्षीय पुत्र सोनू नोएडा में वेल्डिंग का कार्य करता था। उसके पुत्र सोनू व पड़ोस में रहने वाले इंसाफ अली की पुत्री दानिशता के बीच प्रेम प्रसंग था। जिसके चलते दानिशता घर से भाग कर दो बार उसके बेटे सोनू के पास नोएडा भी पहुंच गई थी। इतना ही नहीं दोनों की गाजियाबाद में कोर्ट मैरिज करने की बात भी सामने आई थी। इन सब बातों को लेकर 28 नवंबर 2014 को मोहल्ले में एक पंचायत हुई थी। जिसमें बीते समय में हुए सभी विवादों को समाप्त करने पर सहमति बनी थी। साथ ही सोनू दानिशता ने भी अपने संबंध समाप्त करने की बात मान ली।
लेकिन इस रिश्ते को लेकर युवती पक्ष के लोग उनसे रंजिश मानने लगे। 29 नवंबर की सुबह उसका बेटा सोनू मोहल्ले में ही स्थित एक किराना की दुकान पर बैठा हुआ था। तभी दानिशता के भाई तालिब व आसिफ, माता नूरजहां के अलावा अमीरुद्दीन उर्फ अमीरू और जफरुद्दीन मौके पर पहुंच गए और सोनू की धारदार हथियारों से वार कर हत्या कर दी। साथ ही दानिशता की भी हत्या कर दी गई।
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उक्त मामले में पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की। दोनों पक्षों को सुनने के बाद सोमवार को सुनवाई में अपर सत्र न्यायाधीश/ विशेष न्यायाधीश एससी एसटी एक्ट उमाकांत जिंदल ने फैसला सुनाते हुए पांचों आरोपियों को दोषी करार दिया। पांचों दोषियों को आजीवन कारावास व प्रत्येक पर 70-70 हजार का अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड ना देने की स्थिति में सजा में आठ माह की वृद्धि करने के भी आदेश किए। आदेशों के बाद दोषियों को जेल भेज दिया गया।