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पहाड़ों पर बारिश और बर्फ पिघलने से बढ़ा गंगा का जलस्तर

Sat, 11 Jun 2016 08:15 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हापुड़
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गंगा - फोटो : अमर उजाला
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पहाड़ों पर बारिश और बर्फ पिघलने से गंगा के जलस्तर में एकाएक बढ़ोतरी हो गई है। इससे गंगा के रेतीले टापू पर उगाई जा रही फल-सब्जी की पालेज वाली खेती गंगा में बह गई है। पानी से लबालब हो चुके टापू में बने अस्थाई स्नानघाट अभी तक नहीं हट पाए हैं, जिससे कभी भी बड़ी अनहोनी हो सकती है।
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उमस भरी गर्मी और चिलचिलाती धूप का सिलसिला जारी रहने से पहाड़ों पर जमी बर्फ तेजी से पिघल रही है। वहीं लोकल साइक्लोन बनने से दो दिन झमाझम बारिश भी हुई है। जिससे गंगा के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

दो दिनों में ही भीतर खादर क्षेत्र में गंगा किनारे लौकी, तोरई , भिंडी, सीताफल, खरबूजा, तरबूज, करेला, ककड़ी, खीरा जैसे मौसमी फल-सब्जी की पालेज बहकर नष्ट हो गई है। इससे आढ़तियों का कर्ज लेकर पालेज उगाने वाले किसान परेशान हैं।
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किसानों ने बताया कि जून के पहले पखवाड़े में इतना अधिक जलस्तर कई दशक में नहीं बढ़ा था। जिससे पालेज की खेती करने वालों की हालत खराब है। वहीं ब्रजघाट में गंगा के रेतीले टापू पर बनाए गए अधिकांश अस्थाई घाट चारों ओर से पानी में घिर गए हैं।
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इससे अनहोनी का खतरा मंडरा रहा है। पुलिस-प्रशासनिक स्तर से इन खतरनाक स्नानघाटों को हटवाने पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

एसडीएम शमशाद हुसैन का कहना है कि अनहोनी की आशंका को देखते हुए पुलिस के माध्यम से गंगा की जलधारा में लगे अस्थाई घाटों को तत्काल हटवाया जाएगा।
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