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स्मॉग: स्थिति में सुधार, मगर खतरा बरकरार

Tue, 08 Nov 2016 10:36 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/ हापुड़
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स्मॉग - फोटो : Demo Pic
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जिले में पिछले चार दिन से छाए स्मॉग में थोड़ी कमी तो आई है, मगर खतरा अभी टला नहीं है। प्रदूषण का स्तर अभी भी सामान्य से अधिक है। वहीं, प्रदूषण से लोगों की आंख में जलन के सांस लेने में भी दिक्कत हो रही है।
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यह स्थिति पशु पक्षियों के लिए भी जानलेवा है। मंगलवार को क्षेत्र के वातावरण में पीएम-2.5 का स्तर करीब चार सौ माइक्रोन प्रति क्यूबिक मीटर के आसपास पाया गया, जो सामान्य से चार गुना अधिक है।

वातावरण में मौजूद प्रदूषण के कण 2.5 माइक्रोन काफी छोटे होते हैं। यह आसानी से फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं। इन कड़ों के साथ कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रेट, लेड, कार्बन डाई सल्फाइड इसे और घातक बना रहे हैं।
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चिकित्सक जीवोत्तम नारंग के अनुसार प्रदूषण के ये बारीक कण सांस की नलियों को सिकोड़ते हुए फेफड़ों को प्रभावित करते हैं। लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहने पर फेफड़े खराब होने का खतरा बन जाएगा।

खून की नलियां सिकुड़ने से दिल के दौरे की आशंका बढ़ जाएगी। उन्होंने लोगों को मास्क का प्रयोग करने की सलाह दी है। वहीं, पशु चिकित्सक वाईपी सिंह ने बताया कि प्रदूषण का यह स्तर पशुओं के विकास को प्रभावित कर सकता है।

पक्षियों के लिए यह जानलेवा है। इस स्थिति से पक्षियों की कई प्रजातियां समाप्त तक हो सकती हैं। गौरैया जैसी छोटी प्रजातियां सबसे अधिक प्रभावित होंगी।


छोटे बदलाव से आएंगे सुखद परिणाम
पर्यावरणविद प्रो. अब्बास अली ने बताया कि हम अपनी दिनचर्या में छोटे-छोटे बदलाव से इस स्थिति में सुधार ला सकते हैं। उन्होंने बताया कि सुबह झाड़ू लगाने से पहले पानी का छिड़काव करें, जहां कंस्ट्रक्शन का कार्य चल रहा हो वहां पानी का छिड़काव करें,

कूड़े या किसी भी प्रकार के कचरे में आग न लगाएं, किसान फसलों के अवशेष न जलाएं, जनरेटर व डीजल से चलने वाली गाड़ियों का प्रयोग कम करें, साथ ही साइकिल या ई रिक्शा का प्रयोग करें और अपने आसपास के क्षेत्रों में पौधरोपण करें।
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