जिले में चिकनगुनिया, डेंगू की चपेट में आकर बेशक लोग तड़प रहे हों, लेकिन कमाल यह है कि स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में सिर्फ नौ मरीजों में ही डेंगू और चिकनगुनिया की पुष्टि कर रहा है।
जबकि निजी अस्पतालों में भर्ती बुखार के अधिकांश मरीजों में चिकनगुनिया की पुष्टि की गई है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्वास्थ्य विभाग के अफसर अपनी खामी छिपाने में किस हद तक हवाई रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं।
इस बार चिकनगुनिया का जबरदस्त प्रकोप चल रहा है। अस्पतालों में मरीजों की भरमार है, बुखार के साथ हाथ पैरों में तेज दर्द से मरीज छटपटा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अफसर भी अंदर खाने तो चिकनगुनिया फैलने की बात कह रहे हैं, लेकिन रिकॉर्ड में इसका कोई उल्लेख नहीं कर रहे हैं।
निजी अस्पतालों में भर्ती बुखार के हर तीसरे मरीज में चिकनगुनिया या डेंगू की पुष्टि की गई है। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने इसे नकार दिया है और जिले में चिकनगुनिया, डेंगू का प्रकोप बेहद कम होने का दावा कर रहे हैं।
यही कारण है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी रिपोर्ट में सिर्फ नौ मरीजों में ही चिकनगुनिया या डेंगू की पुष्टि की जा सकी है। शासन को भी इस रिपोर्ट को भेजने की तैयारी शुरू कर दी गई है। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि विभागीय अफसर किस हद तक मरीजों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे हैं।
यह हाल तब है, जबकि 150 से ज्यादा रोगियों की मौत हो चुकी है। दिल्ली, नोएडा और मेरठ के बड़े अस्पतालों में इनकी मौत का कारण बुखार माना गया है। सीएमओ डा.एके सिंह का कहना है कि निजी लैब से मिले सैंपल को सरकारी लैब भेज दिया था। इनमें 9 मरीजों में डेंगू और चिकनगुनिया की पुष्टि हो सकी है।