फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

डंपिंग ग्राउंड - गालंद में आठ नवंबर को होगी महापंचायत

विज्ञापन
डंपिंग ग्राउंड के विरोध में धरना पर बैठे ग्रामीण। - फोटो : PILAKHWA
विज्ञापन
डंपिंग ग्राउंड - गालंद में आठ नवंबर को होगी महापंचायत
विज्ञापन

पिलखुवा। गालंद में प्रस्तावित डंपिंग ग्राउंड के विरोध में आठ नवंबर को महापंचायत होगी। किसान मजदूर संगठन और संघर्ष समिति की ओर से महापंचायत का आयोजन किया जाएगा। महापंचायत साठा चौरासी की होगी और धौलाना विधानसभा के गांवों से बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। इसमें हापुड़ और गाजियाबाद दोनों जनपदों के अधिकारियों के मौजूद होने की संभावना है। इधर, कई गांवों के ग्रामीणों का शुक्रवार को 27वें दिन भी धरना जारी रहा है।
गाजियाबाद नगर निगम द्वारा गालंद गांव में खरीदी जमीन पर डंपिंग ग्राउंड बनाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। धरनारत ग्रामीण गाजियाबाद नगर निगम को चिन्हित जमीन की चारदीवारी करने दे रहे हैं और न ही कूड़ा प्रोसेसिंग करने वाली मशीनों को वहां पर स्थापित होने दे रहे। कूड़े के डंपर तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। पिछले दिनों डीएम हापुड़ अनुज सिंह, डीएम गाजियाबाद राकेश सिंह और गाजियाबाद के नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर भी ग्रामीणों के साथ बैठक कर चुके हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।
विज्ञापन

संघर्ष समिति के पदाधिकारी मनोज तोमर से बताया कि शुक्रवार को धरनास्थल के पास आठ नवंबर को महापंचायत का आयोजन किया जाएगा। मसूरी से लेकर पिलखुवा हापुड़ बॉर्डर तक यानी संपूर्ण धौलाना विधानसभा के गांवों में संपर्क कर ग्रामीणों से महापंचायत में पहुंचने का आह्वान किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि महापंचायत में डंपिंग ग्राउंड के विरोध में आगामी आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने बताया कि महापंचायत में राजनीतिक दलों के लोगों के साथ गाजियाबाद और हापुड़ के अधिकारियों के भी आने की संभावना है। हालांकि पंचायत कराने को लेकर अभी तक ग्रामीणों द्वारा प्रशासनिक स्तर पर अनुमति नहीं ली गई है। वहीं 27वें दिन भी ग्रामीणों का धरना जारी रहा। धरने में सतीश, उर्मिला, मूलचंद, हरिओम, मुकेश, संजू चौहान आदि धरने पर मौजूद रहे।
विज्ञापन

----
मौखिक रूप से महापंचायत की सूचना है। हापुड़ या गाजियाबाद के उच्चाधिकारियों के महापंचायत में पहुंचने की सरकारी सूचना नहीं है। फिलहाल ग्रामीणों ने अभी तक अनुमति भी नहीं ली है। अनुमति के लिए भी उच्चाधिकारियों से बातचीत करने के बाद ही निर्णय लिया जाएगा। - डॉ. तेजवीर सिंह, सीओ पिलखुवा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें